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सूबे की धरती पर तीन नए जिले ले रहे वजूद, सिहोरा का दूर-दूर तक जिक्र नहीं

 


जारी है सिहोरा के दिल से खेलने का सिलसिला, 20 साल से कर रहे आंदोलन, चुनाव के वक्त नेता करते हैं वादे, फिर याद तक नहीं रखते

जबलपुर। राज्य प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग मप्र की धरती पर तीन नए जिलों की सीमाएं तय करने में जुटा हुआ है,लेकिन इन तीन नामों में सिहोरा को जिला बनाए जाने की कवायद दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रही है। दो दशक से सिहोरा के लोग खुद का जिले का नागरिक बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं,लेकिन सरकार लगातार अनसुनी करती जा रही है। बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसी कौन सी वजहें हैं,जिनके कारण  अन्य इलाके तो जिलों में तब्दील हो रहे हैं,लेकिन सिहोरा पर सरकारें केवल आश्वासनों से काम चला रही हैं। 

-क्या है आयोग की तैयारी

मध्य प्रदेश का राज्य प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग प्रदेश में तीन नए जिले पिपरिया, बीना और सीहोरा बनाने की तैयारी में जुटा हुआ है। वहीं निमाड़ को 11वां संभाग बनाने कवायद भी तेज हो रही है। इंदौर के कुछ इलाकों को मिलाकर नया संभाग गढ़ा जा रहा है। इस व्यापक पुनर्गठन का सीधा असर 25 से अधिक जिलों की सीमाओं पर पड़ेगा, जिसके लिए आयोग तेजी से मैदानी कार्य पूरा कर रहा है। 

-जो कर सकते थे, कर चुके

सिहोरा को जिला बनाने की मांग कभी मंद नहीं पड़ी। जब भी चुनाव का अवसर आया या अन्य कोई राजनीतिक अवसर, सिहोरा के लोगों ने आंदोलन को हमेशा जिंदा रखा और अभी भी बीते कुछ दिनों में ही सिहोरा के लोगों ने पानी में डूबकर और मिट्टी में कमर तक धंसकर अपनी मांग दोहराई है,लेकिन सरकार सुनने को तैयार नहीं है। 

-नेताजी फिर भूल गये

बीते चार विधानसभा चुनावों से प्रत्येक नेता चुनाव प्रचार के समय सिहोरा को जिला बनाने की कसमें खाता है,लेकिन चुनाव के बाद अपनी कसम की तरफ पलटकर नहीं देखता। कांग्रेस हो, बीजेपी हो या अन्य कोई और राजनीतिक दल, सभी सिहोरा के लोगों के दिलों से खेल रहे हैं। बीते चुनाव में भी सिहोरा वालों के साथ ऐसी ही ठगी की गयी। जीतने के बाद नेताजी अपना वादा फिर से भूल गये। 

-सरकार ने क्यों साधी  चुप्पी

इस मामले मंे सरकार ने सिहोरा के लोगों को अधर में टांगा हुआ है। जानकार मानते हैंे कि यदि इसे जिला नहीं बनाया जा सकता तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए और यदि बनाया जा सकता है तो प्रक्रिया ‘ाुरु करनी चाहिए, लेकिन सरकार ने सबको अंधेरे मंे रखा हुआ है। इसके पीछे वोट की राजनीति काम कर रही है। यदि सरकार स्पष्ट इंकार करेगी तो पूरे इलाके में वोट का बड़ा नुकसान हो सकता है। 


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