ताकि करंट से बेमौत ने मरें मासूम परिंदे...


ट्रांसको की बड़ी उपलब्धि, ट्रांसमिशन लाइनों पर लगाया बर्ड सेफ्टी सिस्टम, अब पक्षी होंगे पूरी तरह सुरक्षित

जबलपुर। मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने समूचे मध्य प्रदेश में अब ऊँचे जंगलों, पहाड़ियों और नदियों के ऊपर से गुजरने वाली 132 केवी एक्स्ट्रा हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों पर पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो गई है। मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने राज्यभर में लगभग 1000 किलोमीटर लंबी लाइनों पर 1,53,384 बर्ड गार्ड्स लगाकर एक बड़ा कदम उठाया है। इससे उड़ान भरते समय या बैठने के दौरान लाइनों से टकराकर होने वाली पक्षियों की मौतों पर रोक लगेगी। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के अनुसार, यह पहल न केवल जैव-विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण है बल्कि इससे राज्य की ग्रिड विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। बड़े आकार के पक्षी जैसे भारतीय सारस और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोड़ावन)अक्सर टॉवरों या कंडक्टर से टकराकर घायल या मृत पाए जाते थे। विशेषज्ञों ने इसे लंबे समय से “मौन त्रासदी” कहा है। राज्य में लागू यह मॉडल अब देश के अन्य हिस्सों के लिए भी एक उदाहरण माना जा रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि यह कदम दुर्लभ पक्षियों की प्रजातियों को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

-ये है पांच साला रिकॉर्ड

पिछले पाँच वर्षों में प्रदेश में 72 जगहों पर पक्षी टकराने की घटनाएँ दर्ज की गईं, जिनमें कई बार 127 शहरों और कस्बों में बिजली सप्लाई भी प्रभावित हुई। इस चुनौती को देखते हुए ट्रांसको ने एक व्यापक सुरक्षा सिस्टम लागू किया है।

-ये उपकरण लगाए गये हैं

बर्ड गार्ड्सः टॉवरों पर ऐसे सुरक्षा कवच, जो पक्षियों को लाइव कंडक्टर से दूर रखते हैं।

-प्रिवेंटसर्ः इंसुलेटरों पर लगाए गए रिंग-टाइप उपकरण, जो पक्षियों को संवेदनशील जगहों पर बैठने से रोकते हैं।

-फ्लैपसर्ः कंडक्टरों पर लगाए जाने वाले परावर्तक और हलचल वाले मार्कर, जो उड़ते पक्षियों को पहले ही चेतावनी देते हैं।

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