चंद क्लिक और हाथ में आ रही पुरानी रजिस्ट्री



सरकार ने शुरू की डिजिटल सुविधा,अभी साल 2000 से 2015 के दस्तावेज मिल रहे,प्रकिया जारी

जबलपुर। अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने और पुराने कागजों की तलाश में सिर खपाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेशभर की लाखों पुरानी प्रॉपर्टी रजिस्ट्रियों को डिजिटल रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।  जबलपुर की करीब दो लाख पुरानी रजिस्ट्री को भी अब भी अॉनलाइन किया जा रहा है। इससे आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी और संपत्ति से जुड़ी धोखाधड़ी पर अंकुश लगेगा।

-2000 से 2015 तक की रजिस्ट्री अॉनलाइन

राज्य शासन ने इस वृहद परियोजना के पहले चरण में साल 2000 से 2015 तक की सभी मैनुअल रजिस्ट्रियों को डिजिटाइज कर दिया है। अब यह रिकॉर्ड अॉनलाइन उपलब्ध हैं। अधिकारी बताते हैं कि अब अगला लक्ष्य 1995 तक के रिकॉर्ड को डिजिटल करने का है, जिससे 30 साल तक पुराने दस्तावेज भी एक क्लिक में उपलब्ध हो सकेंगे।

-धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम

प्रदेश में अगस्त 2015 से लागू ई-रजिस्ट्ी प्रणाली पहले ही पारदर्शिता का नया उदाहरण बन चुकी है। ‘संपदा सॉफ्टवेयर’ के जरिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित हो गई है। अब पुरानी रजिस्ट्री के डिजिटल होने से 15 साल तक की रिपोर्ट अॉनलाइन मिलनी शुरू हो गई है, जिससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी।

-जनता को होंगे ये बड़े फायदे

रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे, अब मैनुअल कॉपी गुम या खराब होने पर भी डिजिटल कॉपी दोबारा डाउनलोड की जा सकेगी। पुराने कागजों में जालसाजी की संभावना अब नहीं रहेगी।

-ऐसी है प्रक्रिया

 mpigr.gov.in वेबसाइट पर जाकर मात्र 500 शुल्क देकर लॉगिन आईडी बना सकते हैं और अपनी पुरानी रजिस्ट्री की सत्यापित प्रति डाउनलोड कर सकते हैं। सरकार का यह कदम न सिर्फ संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित करेगा, बल्कि आम नागरिक को सरकारी दफ्तरों से मुक्ति भी दिलाएगा। जबलपुर सहित पूरे प्रदेश के लिए यह डिजिटल पहल प्रशासनिक पारदर्शिता और सुगम सेवा वितरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

-मुख्य बातें

पहला चरण पूरा: साल 2000 से 2015 तक की रजिस्ट्री अब ऑनलाइन उपलब्ध।

जबलपुर में तेजी: करीब 2 लाख पुरानी रजिस्ट्री को डिजिटाइज़ किया जाएगा।

अगला लक्ष्य: 1995 तक के रिकॉर्ड को भी डिजिटल बनाने की योजना।

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