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हाईकोर्ट ने रोका पमरे का आदेश,ठेकेदार को बड़ी राहत

 


रेलवे ठेकेदार ने 10.24 लाख की वसूली ऑर्डर के खिलाफ कोर्ट से की थी गुहार,रेलवे को नोटिस, पूरी जांच रिपोर्ट और रिकॉर्ड पेश करें

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रेलवे द्वारा ठेका शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाकर ठेकेदार कंपनी पर 10 लाख 24 हजार रुपए की वसूली थोपने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने रेलवे को निर्देश दिया कि वह पूरी जांच रिपोर्ट और संबंधित रिकॉर्ड अगली सुनवाई पर प्रस्तुत करे। यह याचिका केरल की थारू एंड संस कंपनी ने दायर की थी। कंपनी की ओर से अधिवक्ता अजय रायजादा और अमित रायजादा ने तर्क रखते हुए बताया कि पश्चिम मध्य रेलवे ने कंपनी को एसी कोच के यात्रियों को कंबल, चादर आदि उपलब्ध कराने का ठेका दिया था।

क्या था मामला

22 जुलाई 2022 को हजरत निजामुद्दीन–जबलपुर ट्रेन के एसी कोच एच–1 में कपिल ताम्रकार कोच अटेंडेंट के रूप में ड्यूटी पर था। यात्रा के दौरान एक बुजुर्ग बीमार महिला की मदद करने के लिए वह ट्रेन से नीचे उतरा। वापस चढ़ते समय ट्रेन चलने लगी और वह गिर गया। हादसे में उसके बाएँ पैर का अंगूठा और तीन उंगलियाँ कट गईं। कपिल ने रेलवे दावा अधिकरण में मुआवजा दावा दायर किया। अधिकरण ने रेलवे को निर्देश दिया कि कपिल को 8 लाख रुपए ब्याज सहित दिए जाएँ।

पमरे ने पूरी राशि ठेकेदार पर डाल दी

मुआवजा देने से बचने के लिए रेलवे ने 26 सितंबर 2025 को ठेका कंपनी को नोटिस जारी कर कहा कि,

  • कोच अटेंडेंट उनकी कंपनी का कर्मचारी था
  • इसलिए ठेका शर्तों के उल्लंघन के कारण 10.24 लाख रुपए कंपनी ही चुकाए
  • भुगतान न होने पर आगामी बिल से राशि काट ली जाएगी

कंपनी की दलील

कंपनी ने कोर्ट में कहा कि,

  • हादसे का ठेका शर्तों से कोई संबंध नहीं
  • कोच अटेंडेंट की ड्यूटी ट्रेन संचालन के अधीन थी
  • रेलवे को अधिकरण के आदेश के खिलाफ अपील करनी चाहिए थी
  • जिम्मेदारी ठेकेदार पर नहीं थोपी जा सकती

दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने रेलवे की वसूली कार्यवाही पर रोक लगाते हुए मामले का पूरा रिकॉर्ड तलब कर लिया है। अगली सुनवाई में रेलवे को विस्तृत जवाब देना होगा।

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