सरकारी संपत्तियों पर कर्मचारी संगठनों का कब्जा खत्म होगा!

 


सरकार की बड़ी कार्रवाई, सभी कलेक्टर से तलब रिपोर्ट

जबलपुर। मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग पर अब बड़ा एक्शन मोड अपना लिया है। कई कर्मचारी संगठनों द्वारा सरकारी जमीन, भवन और आवासों का कार्यालय और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग किए जाने की बढ़ती शिकायतों के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने जबलपुर सहित सभी जिलों के कलेक्टरों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। सरकार ने साफ किया है कि अब किसी भी संगठन या निजी व्यक्ति को सरकारी संपत्तियों से "आय अर्जित" करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

-इसलिये मिली थी जमीन

जानकारी के अनुसार, वर्षों पहले कई कर्मचारी संघों और यूनियनों को सरकारी दफ्तर चलाने के नाम पर भवन, कमरे या जमीन आवंटित की गई थी। लेकिन समय के साथ कई संगठनों ने इन संपत्तियों का उपयोग प्राइवेट दफ्तर, किराये पर मीटिंग हॉल, स्टोरेज और आर्थिक गतिविधियों के रूप में शुरू कर दिया था। कुछ संगठनों से नियमित रूप से आय अर्जित करने की शिकायतें भी सरकार तक पहुंचीं।


-सरकार ने कलेक्टर  से क्या पूछा 

किस संगठन के पास कौन-सी सरकारी संपत्ति है?

कितने सालों से उपयोग किया जा रहा है?

क्या आधिकारिक स्वीकृति है?


-क्या संपत्ति से आय अर्जित की जा रही है?

यदि किसी भी संपत्ति का उपयोग नियमों के विरुद्ध पाया जाता है, तो सरकार उसे तत्काल वापस लेने की तैयारी में है। सूत्र बताते हैं कि राज्य के सबसे प्रभावशाली कर्मचारी संगठनों के पास भी कई सरकारी संपत्तियाँ हैं, जिनका उपयोग वर्षों से कार्यालय और बैठकों के लिए हो रहा है। कुछ स्थानों पर व्यावसायिक उपयोग की पुष्टि भी हुई है। सरकार का उद्देश्य है कि राज्य की संपत्तियों का उपयोग सिर्फ सरकारी कार्य के लिए हो। यदि कोई संगठन सरकारी संसाधनों पर बैठकर निजी लाभ कमा रहा है, तो उस पर रोक लगाई जाएगी और कार्रवाई तय होगी। यह कदम आने वाले दिनों में कई बड़े कर्मचारी संगठनों के लिए चुनौती बन सकता है, क्योंकि सरकार अब इन संपत्तियों को लेकर पूरी तरह सतर्क और सक्रिय हो चुकी है।



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