जबलपुर। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस पर 15 नवम्बर को प्रदेश की जेलों से 32 बंदियों को रिहाई मिलेगी। यह रिहाई उनके अच्छे आचरण की वजह से मिल रही है। रिहा होने वाले इन बंदियों में नेताजी सुभाषचंद्र बोस केन्द्रीय कारागार के 6 बंदी शामिल हैं। इनमें एक महिला बंदी भी है।
उप जेल अधीक्षक मदन कमलेश ने बताया कि भोपाल के आदेशानुसार 15 नवम्बर राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस पर आजीवन कारावास की सजा से दंडित बंदियों को सजा में छूट-विशेष परिहार दिये जाने पर रिहा किये जाने के निर्देशानुसार केन्द्रीय जेल जबलपुर में परिरूद्ध आजीवन कारावास की सजा से दंडित बंदियों को शासन आदेश में दी गई कण्डिकाओं के अनुसार 05 पुरुष एवं 01 दंडित महिला बंदी कुल 06 दंडित बंदी को रिहा किया जाएगा। इन्होनें 14 वर्ष की वास्तविक सजा एवं परिहार सहित 20 वर्ष की सजा भुगत ली है। ये बंदी जबलपुर, छिन्दवाड़ा, कटनी, होशंगाबाद के हैं।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। जहां वर्ष में पांच बार आजीवन कारावास के बंदियों को दिशा-निर्देशों में पात्रता अनुसार सजा से छूट प्रदान करके समय पूर्व रिहाई दी जाएगी। इसके पहले तक साल में चार बार बंदियों को रिहा किया जाता था, जिसमें स्वतंत्रता दिवस ब्रिटिश शासन से मुक्ति का प्रतीक है। गणतंत्र दिवस संविधान लागू होने और भारत को एक गणराज्य बनने का उत्सव है। गाधी जयंती राष्ट्रपिता की जयंती और डा भीमराव अंबेडकर जयंती समानता दिवस का प्रतीक ठीक उसी प्रकार भगवान बिरसा मुण्डा जयंती राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस, जो जनजाति समाज की परम्परागत प्राधीन रानातन संस्कृति के संरक्षण, स्वधर्म से स्वराज की स्थापना के संघर्ष और अस्मिता के पुर्नजागरण के प्रतीक के रूप में स्मरण करने का दिन है।