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OMG : एमपी में पीडबलूडी की करोड़ों की बिल्डिंग को ही बागेश्वर धाम के मुख्य सेवादार ने अपने नाम कराया, मचा हड़कम्प

छतरपुर. मध्य प्रदेश में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. बागेश्वर धाम के पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खासमखास सेवादार ने सरकार को करोड़ों का चूना लगा दिया. धाम के मुख्य सेवादार ने पीडबलूडी की करोड़ों की सरकारी बिल्डिंग को ही अपने नाम करा लिया. मामले का खुलासा होने पर कलेक्टर ने रजिस्ट्री और नामातंरण पर रोक लगाकर जांच के आदेश दिए हैं. फर्जीवाड़ा कर जिस बिल्डिंग की रजिस्ट्री कराई गई, वह नजूल और नगरपालिका के सरकारी रिकॉर्ड में भी पीडबलूडी के नाम दर्ज है.

बताया जाता है कि बागेश्वर धाम के मुख्य सेवादार और बाबा बागेश्वर की दिल्ली से वृंदावन निकलने वाली यात्रा का प्रभारी धीरेंद्र गौर के कारनामे से पूरे जिले में हड़कंप मचा है. पीडबलूडी की सरकारी बिल्डिंग की रजिस्ट्री अपने नाम कराने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए. इसके बाद ये भवन धीरेंद्र गौर और गोटेगांव के दुर्गेश पटेल के नाम दर्ज हो गई. मामले की जानकारी लगते ही पीडबलूडी सहित जिला प्रशासन के हाथ-पांव फूलना शुरू हो गए.

किरायेदारों से मिलीभगत कर रजिस्ट्री कराया

मामले के अनुसार छतरपुर शहर स्थित पीडबलूडी की सरकारी बिल्डिंग में कई सालों से रहने वाले उपाध्याय परिवार ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए. करोड़ों की बिल्डिंग को कौडिय़ों के भाव बाबा बागेश्वर के दाहिने हाथ खास सेवादार धीरेन्द्र गौर सहित गोटेगांव के दुर्गेश पटेल ने 81 लाख रुपए में अपने नाम करा ली. उपपंजीयक ने बाकायदा रजिस्ट्री करा दी. जब शहर में इस बिल्डिंग को 9 करोड़ में बेचने की बातें चलना शुरू हुईं तो हल्ला मच गया. मामला गर्माने पर इसकी जांच की गई तो पता चला कि भवन की रजिस्ट्री हो चुकी है. ये भवन छतरपुर के कोतवाली के पास बालाजी मंदिर के सामने है. यह भवन छतरपुर महाराज द्वारा सरकार को दिया गया था, जो आज भी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है.

कलेक्टर ने लगाया नामांतरण पर रोक

सरकारी रिकॉर्ड में दरोगा पंडित के पुत्र और पूर्व में कानूनगो रहे उमाशंकर तिवारी को यह बिल्डिंग पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा रहने के लिए किराए के तौर पर अलॉट की गई थी, जिसका किराया भी बाकायदा पीडब्ल्यूडी की भवन पुस्तिका में 64 नंबर पर भी दर्ज है, जिसका नाम हाउस ऑफ उमाशंकर तिवारी दफ्तरी वाला के नाम से दर्ज है. मामला सुर्खियों में आने पर छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने नामातंरण पर रोक लगी दी है और एक टीम का जांच टीम का गठन कर दिया. वहीं, पीडबलूडी के चीफ इंजीनियर कोर्ट जाने की बात कह रहे हैं. बिल्डिंग पर नोटिस चस्पा करवा दिया है.


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