जबलपुर। जबलपुर का एक आम शहरी मेडिकल युनिवर्सिटी को अपने शहर के लिए एक बड़ी सौगात मानता है,लेकिन जब उसके सामने ये हकीकत रखी आएगी तो उसे बेहद निराशा ही होगी। मप्र का सबसे पहला आयुर्विज्ञान विवि के 15 साल के सफर में बजट में लगातार 75 प्रतिशत की कटौती हुई और तय पदों में से 90 फीसदी कुर्सियां आज भी खाली पड़ी हुई हैं। हैरतअंगेज ये है कि इस विवि में कुलसचिव जैसे अहम पदों पर भी अधिकारियों की नियुक्ति नहीं की जा सकी। ये विवि चंद अधिकारियों के हवाले है और घिसटते हुए प्रदर्शन कर रही है,जिसका सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों को हो रहा है।
-ऐसे किया गया सौतेला व्यवहार
सरकार ने मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना का उद्देश्य था कि क्षेत्रीय यूनिवर्सिटीज से चिकित्सा शिक्षा को पृथक कर पूरे प्रदेश में एक साथ एक पाठ्यक्रम स्थापित करना, ताकि चिकित्सा शिक्षा में गुणवत्ता में सुधार हो और परीक्षाएं एक साथ आयोजित हो सकें। विवि के स्थापना के समय यह प्रावधान किया गया था कि यूनिवर्सिटी स्वशासी संस्था के रूप में होगी। विवि द्वारा निर्धारित संबद्धता शुल्क, परीक्षा फीस समेत अन्य शुल्क आय के स्रोत होंगे। राज्य सरकार की ओर से इस विवि के लिए सपने तो बड़े दिखाए,लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए जरूरी संसाधनों पर कैंची चला दी। इस विवि में कई एक पद ऐसे हैं,जो हैं तो बेहद महत्वपूर्ण,लेकिन इन पर आज तक किसी की नियुक्ति नहीं की गयी।
-कितना शानदार था आगाज
साल 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जबलपुर में एमयू की स्थापना का ऐलान किया। साल 2011 में ये विवि वजूद में आया। स्थापना के समय तय हुआ था कि 15 करोड़ से इस प्रोजेक्ट को शुरु किया जाएगा,लेकिन आने वाले सालों में ये बजट न्यून से न्यूनतम होता गया और आज की स्थिति बेहद दयनीय हो गयी है। यूनिवर्सिटी की स्थापना के वक्त कुल 275 पद स्वीकृत हैं, वर्तमान में सिर्फ 32 पद भरे हुए हैं। संसाधनों की कमी के बावजूद ये विवि मेडिकल, डेंटल, आयुष के साथ नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों का दायित्व भी संभाले हुए है,जिससे शेड्यूल बार-बार बाधित हो जाता है।
-साजिश से भी इंकार नहीं
एमयू के प्रबंधन से जुड़े अधिकारी और शहर के जानकार ये दावा करते हैं कि विवि की स्थिति इसलिए दिनोंदिन ऐसी की जा रही है ताकि इसे यहां से कहीं और शिफ्ट करने के लिए बहाना तैयार किया जा सके। अपने शुरुआती दौर पर अच्छा प्रदर्शन करने वाली युनिवर्सिटी कई स्तरों पर फीकी पड़ चुकी है। उल्लेखनीय है कि हाल ही इस विवि को जबलपुर से शिफ्ट करने की कागजी तैयारी पूरी कर ली गयी थी,लेकिन विरोध दर्ज कराने के बाद वो फाइल फिलहाल बंद कर दी गयी है।
