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बेरहम निजाम: 20 साल की नौकरी के बाद अब जांचेंगे काबिल हो या नहीं

 


जबलपुर के साढ़े तीन हजार  शिक्षकों  की नौकरी खतरे में, सुको के आदेश के बाद एलिजिबिलिटी टेस्ट की तैयारी

जबलपुर। जिले के करीब साढ़े तीन हजार शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटकी हुई है। ये वे शिक्षक हैंएजिन्हें 2005 में बिना शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी पास किए ही सीधी भर्ती के जरिए नियुक्ति दी गयी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने इनकी पात्रता पर सवालिया निशान लगा दिया है। हालाकि, न्यायालय ने एक अवसर दिया हैएलेकिन यदि राज्य सरकार की ओर से लापरवाही हुई तो प्रदेश स्तर पर इन शिक्षकों की नौकरी जाना तय है।

-सर्विस पर क्यों आई आंच

साल 2005 में जब इन शिक्षकों की भर्ती की गयी तब पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य नहीं थाएलेकिन बाद में जब मामला सुको पहुंच गया तो न्यायालय ने आदेश दिया कि शिक्षक पात्रता परीक्षा ;टीईटीद्ध उत्तीर्ण करना शिक्षक बनने के इच्छुक उम्मीदवारों के साथ.साथ पदोन्नति की इच्छा रखने वाले सेवारत उम्मीदवारों के लिए भी अनिवार्य है। जिन शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले हुई थी और जिनकी सेवा अवधि अभी पांच वर्ष से अधिक शेष हैए उन्हें टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए दो वर्ष का समय दिया जाएगा।

-शिक्षकों की पीड़ा और अफसरों का तर्क

 अपात्र घोषित होने की कगार पर पहुंचे जबलपुर के शिक्षकों का कहना है कि उनकी भर्ती विभागीय नियमों के आधार पर हुई थी, इसके लिए विभाग जिम्मेदार है। इधर, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सुको के आदेश का अक्षरशरूपालन किया जाएगा। जल्दी ही परीक्षा कराने का फैसला लिया जाएगा।  परीक्षा में सफल होने वालों को नियमित किया जाएगा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई ) 2011 में लागू हुआ। इसके बाद से शिक्षक बनने के लिए टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।

-भोपाल भेजी जाएगी जानकारी

शिक्षा विभाग भोपाल के अधिकारियों ने जबलपुर में ऐसे शिक्षकों की संख्या की जानकारी मांगी है,जो अपात्र होने की जद में आ सकते हैं। अधिकारी जानकारी भेजने की प्रक्रिया शुरु कर चुके हैं। वहीं,शिक्षक संगठनों ने भी अपने स्तर पर प्रयास प्रारंभ किए हैं,लेकिन अफसरों-नेताओं ने हाथ खड़े कर दिए हैं। प्रकरण उच्चतम न्यायालय से जुड़ा है, इसलिए परीक्षा कराए जाने के अलावा अन्य विकल्प नहीं है।

-वर्जन

-एग्जाम से तय करेंगे पात्र

सुको के आदेश का पालन शुरु किया जा चुका है। हमने सभी जिलों से शिक्षकों की जानकारी मांगी है। बिना टेस्ट वाले शिक्षकों की परीक्षा ली जाएगी और पास होने वालों को नियमित किया जाएगा। शासन स्तर से निर्णय लिया जा रहा है।

 केके द्विवेदी,संचालक,लोक शिक्षण संचालनालय

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