नई दिल्ली. केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) में शामिल होने का विकल्प देने के लिए 30 सितंबर आखिरी तिथि है। हैरानी की बात है कि केंद्र सरकार में 2464437 कर्मचारी, एनपीएस में शामिल हैं। इनमें से 24 सितंबर तक महज 70670 केंद्रीय कर्मचारियों ने यूपीएस में शामिल होने का विकल्प दिया है।
पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) ने महाराष्ट्र राज्य जुनी पेन्शन संघटना (एनएमओपीएस महाराष्ट्र) के सोशल मीडिया प्रमुख विनायक चौथे द्वारा लगाई गई आरटीआई के जवाब में 29 सितंबर को ये जानकारी दी है। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार, एनएमओपीएस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वितेश खांडेकर, नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत के अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल और कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव एसबी यादव का कहना है कि यूपीएस पूरी फेल हो गई है। केंद्र सरकार ने कर्मियों ने इस पेंशन योजना को नकार दिया है। कर्मचारियों की एक ही मांग है कि सरकार गैर-अंशदायी पुरानी पेंशन योजना बहाल करे।
केंद्र सरकार की पेंशन योजना यूपीएस को लेकर कर्मचारी, उत्साहित नहीं हैं। एनपीएस में शामिल कर्मियों को पहली अप्रैल 2025 से 30 जून 2025 तक यूपीएस में शामिल होने का विकल्प देना था। इस अवधि में केंद्र के तीस लाख कर्मियों में से 31,555 कर्मचारियों ने ही यूपीएस का विकल्प चुना। इसके बाद सरकार ने यूपीएस के प्रति कर्मियों की उदासीनता को देखते हुए विकल्प चुनने की अंतिम तिथि को 30 सितंबर तक बढ़ा दिया था। अब 24 सितंबर तक 70 हजार कर्मचारी ही यूपीएस में शामिल हो सके हैं। इनमें सिविल डिपार्टमेंट के 21366, डाक विभाग के 9996, टेलीकॉम के 130, रेलवे के 18024 और डिफेंस सिविल सेक्टर के 7058 कर्मचारियों ने यूपीएस का विकल्प चुना है।
ओपीएस बहाली के लिए संघर्ष कर रहे महाराष्ट्र राज्य जुनी पेन्शन संघटना के अध्यक्ष और एनएमओपीएस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वितेश खांडेकर का कहना है कि सरकार ने ओपीएस की जगह यूपीएस लागू कर दिया। आखिरी सप्ताह की रिपोर्ट को देखें तो मात्र तीन फीसदी एनपीएस कर्मी ही यूपीएस में शामिल हुए हैं। कर्मचारियों की एक मात्र मांग ओपीएस लागू कराना है। यूपीएस, कर्मियों को मंजूर नहीं हैं। 25 नवंबर को दिल्ली में यूपीएस के खिलाफ एक बड़े आंदोलन का आगाज होगा।
नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत के अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने बताया, मंगलवार को विकल्प देने का आखिरी दिन है। अभी तक महज दो तीन फीसदी कर्मियों ने ही यूपीएस का विकल्प चुना है। ये स्कीम फेल होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार ने अभी तक इसकी तिथि को आगे नहीं बढ़ाया है। ओपीएस/एनपीएस के विकल्प के तौर पर सरकार, यूपीएस को लेकर आई थी। सरकार ने यूपीएस का ड्रॉफ्ट तैयार करने के लिए मेहनत की, लोगों ने रिसर्च की।
नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत द्वारा शुरु से ही यह बात कही जा रही है कि नाम कुछ भी हो, लेकिन कर्मचारी का अंशदान जब तक उसे वापस मिलने का प्रावधान नहीं होगा, वीआरएस के दिन से पेंशन मिलने का प्रावधान नहीं होगा, तब तक कर्मचारी इसके प्रति उदासीन रहेंगे। बतौर डॉ. मंजीत सिंह पटेल, हमने केंद्र सरकार से मांग की है कि इन दोनों महत्वपूर्ण बदलावों पर गौर किया जाए, तभी यह स्कीम सफल हो सकती है।
अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार कहते हैं, कर्मियों को किसी भी सूरत में यूपीएस मंजूर नहीं है। उन्हें केवल पुरानी पेंशन ही मंजूर है। अभी जिन कर्मियों ने यूपीएस अपनाया है, उनमें अधिकांश एक्ससर्विस मैन हैं। उनके दिमाग में था कि यूपीएस में हर माह दस हजार रुपये बतौर पेंशन मिलेंगे। बाद में उन्हें पता चला कि इसके लिए तो 25 साल की सेवा होनी चाहिए। यूपीएस का विकल्प देने के बाद अब उन्हें भी पछतावा हो रहा है। कर्मचारी संगठन, सरकार से दोबारा यह अपील कर रहे हैं कि यूपीएस की बजाए उनकी पुरानी पेंशन बहाल की जाए। श्रीकुमार ने एनपीएस और यूपीएस की आलोचना करते हुए कहा कि ये दोनों योजना, विनाशकारी हैं। एनपीएस के दायरे में आने वाले 97 फीसदी से अधिक कर्मचारियों ने यूपीएस को अस्वीकार कर दिया है।
केंद्रीय कर्मचारी संगठन, कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव एसबी यादव ने बताया, सरकार को पुरानी पेंशन बहाली सहित दूसरी मांगें माननी पड़ेंगी। सरकार ने कर्मियों के हितों की तरफ ध्यान नहीं दिया तो भविष्य में केंद्रीय कर्मचारी संगठन, कोई भी कठोर निर्णय ले सकते हैं। सरकार को अंशदायी एनपीएस और यूपीएस, ये दोनों योजनाएं वापस लेनी पड़ेंगी। पुरानी पेंशन योजना को बहाल करना होगा। यादव ने कहा, सरकार ने यूपीएस को जबरदस्ती कर्मचारियों पर थोपा है। कर्मचारियों की एक ही मांग रही है और वह है ओपीएस। पुरानी पेंशन बहाली के अलावा कर्मियों को कोई दूसरी योजना नहीं चाहिए। यही वजह है कि इतने दिन बाद भी कर्मियों ने यूपीएस की तरफ जाने का विकल्प नहीं अपनाया।
