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अमीर बनने का सपना दिखाकर करोड़ों की ठगी,क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर लोगों से लिए रुपए, एप संचालक फरार

छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा में जल्दी अमीर बनने का सपना दिखाकर चौरई नगर और आसपास के गांवों के सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। जयपुर की एक कंपनी ने क्रिप्टो करेंसी और ब्लॉक चैन सिस्टम के नाम पर करीब पांच करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी कर दी। शुरुआत में निवेशकों को हर सप्ताह रिटर्न दिया गयाए जिससे लोगों का भरोसा लगातार बढ़ता गया।

                               लोगों ने सोचा कि अब उनका भविष्य सुरक्षित है और कम समय में अच्छी कमाई हो जाएगी। इसी बीच कंपनी ने सीट नाम की अपनी डिजिटल करेंसी लॉन्च की और इसमें निवेश कराने के लिए बड़े-बड़े सपने दिखाए। निवेशकों को बताया गया कि सीट कॉइन की कीमत 80 रुपए प्रति यूनिट है और इसमें पैसा लगाने से एक साल में रकम चार गुना हो जाएगी। निवेशक अब पुलिस और प्रशासन के चक्कर लगा रहे हैं। चौरई के अवनीत गंगवाल, प्रदीप शर्मा, नीरज शर्मा सहित कई पीडि़तों ने एसपी अजय पांडे और सांसद विवेक बंटी साहू को लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत में संचालक रामस्वरूप काव्या और पीसी जैन पर आरोप लगाते हुए उनकी तत्काल गिरफ्तारी और ठगी गई रकम वापस दिलाने की मांग की गई है।

कई लोगों ने जमीनें बेचकर एप में पैसे डाले-

कंपनी ने पहले कुछ हफ्तों तक खातों में समय पर रिटर्न भेजकर विश्वास और लालच दोनों को मजबूत किया। जब लोग पूरी तरह फंस गए तो कंपनी ने उनसे सीट करेंसी में ज्यादा से ज्यादा पैसा लगाने का दबाव बनाया। दुबई ट्रिप, करोड़पति बनने का लालच और तेजी से बढ़ती क्रिप्टो मार्केट के झूठे आंकड़े दिखाकर लोगों को यकीन दिलाया कि पैसे लगाने से लाइफ सेट हो जाएगी। कई परिवार इस झांसे में आए और कुछ लोगों ने अपनी जमीनें तक बेच दीं और बच्चों की पढ़ाई, शादी तथा अन्य जरूरी खर्चों के लिए बचाई गाढ़ी कमाई भी कंपनी को सौंप दी।

एप बंद होने के बाद संचालक फरार-

कुछ ही महीनों बाद जब कंपनी के पास भारी रकम जमा हो गई तो अचानक कंपनी का एप बंद हो गया और संचालक फरार हो गए। निवेशक अपने खाते में लॉगिन तक नहीं कर पाए। जब लोगों ने संपर्क करने की कोशिश की तो पता चला कि कंपनी के मुख्य संचालक रामस्वरूप काव्या (किशनगढ़, जयपुर) और उनके सहयोगी पीसी जैन भी संपर्क से बाहर हैं।

अपनी जमापूंजी लगाकर पछता रहे लोग-

अब चौरई और आसपास के गांवों के सैकड़ों परिवार अपनी मेहनत की कमाई वापस पाने के लिए दर.दर भटक रहे हैं। अवनीत गंगवाल ने बताया कि शुरुआत में उन्हें हर हफ्ते पैसे मिलते रहेए जिससे उन्होंने बड़े निवेश करने का साहस किया। नीरज शर्मा ने कहा कि पहले तो हर हफ्ते खाते में पैसे आते रहे। हमने सोचा भविष्य सुरक्षित हो गया है, लेकिन अब न एप चल रहा है और न कंपनी। जो कुछ भी बचाया था, सब डूब गया। 


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