स्थानीय निवासी राकेश पटेल ने बताया कि स्वं सहायता समूह द्वारा तैयार खीर में जिंदा इल्लियां तैरती मिलीं। इतना ही नहीं, पूड़ी में भी घुन पाए गए। यह खुलासा तब हुआ जब एक मासूम बच्चा आंगनबाड़ी से खीर घर लेकर आया। परिजनों ने जैसे ही डिब्बा खोला, खीर में बड़ी-बड़ी इल्लियां और रेंगते लार्वा दिखे। नजारा देखकर परिवार दंग रह गया और तुरंत गांव के अन्य लोगों को सूचना दी। घटना सामने आते ही ग्रामीणों और बच्चों के परिजनों में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों का कहना है कि जिस योजना का मकसद बच्चों को पौष्टिक भोजन देना था वही अब उनकी जिंदगी से खिलवाड़ कर रही है। गांव वालों ने जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई और बच्चों को स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराने की मांग की है। मामले ने मिड-डे मील योजना की गुणवत्ता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को परोसा जाने वाला भोजन आखिर किस तरह की जांच से गुजर रहा है..क्या यह लापरवाही प्रशासन की आंखों के सामने होती रही। ग्रामीणों की मांग है कि दोषी स्वसहायता समूह पर तुरंत कार्रवाई की जाए और मिड-डे मील में स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।