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बारिश पर ब्रेक ! अब मानसून रिटर्न, आईएमडी की भविष्यवाणी


नई दिल्ली।  
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 15 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से वापस लौटने लगेगा। इस साल मॉनसून सामान्य तिथि से पहले ही पूरे देश में पहुंच गया था। देश में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से 34 फीसदी ज्यादा वर्षा हुई है।

 मौसम विभाग के अनुसार, इस साल सामान्य स्थिति से दो दिन पहले ही दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 15 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से वापस लौटना शुरू हो जाएगा। मौसम विभाग ने शु्क्रवार को यह जानकारी साझा की। मॉनसून आमतौर पर एक जून तक केरल में दस्तक देता है और आठ जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है। यह 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से वापसी शुरू करता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह से लौट जाता है।

आईएमडी ने एक बयान में कहा, 15 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल होती जा रही हैं। इस साल, मॉनसून आठ जुलाई की सामान्य तिथि से नौ दिन पहले ही पूरे देश में पहुंच गया था। 2020 के बाद पहली बार पूरे देश में इतनी जल्दी मॉनसूनी बारिश शुरू हो गई थी। 2020 में मॉनसून 26 जून तक पूरे देश में पहुंच चुका था। इस साल, मॉनसून 24 मई को केरल पहुंचा था, जो 2009 के बाद से भारत में इसका सबसे जल्दी आगमन था। 2009 में मॉनसून ने 23 मई को केरल में दस्तक दी थी।


देश में अब तक मॉनसून के मौसम में 778.6 मिलीमीटर की सामान्य बारिश के मुकाबले 836.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो सात प्रतिशत अधिक है। उत्तर-पश्चिम भारत में 720.4 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो सामान्य वर्षा 538.1 मिलीमीटर से 34 फीसदी ज्यादा है। असामान्य रूप से भारी बारिश के साथ-साथ कई चरम मौसमी घटनाएं भी दर्ज की गई हैं।

पंजाब को दशकों में सबसे भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है, जहां उफनती नदियां और टूटी नहरों के कारण हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई और लाखों लोग विस्थापित हो गए हैं। हिमालयी राज्यों में बादल फटने, अचानक आई बाढ़ और बड़े पैमाने पर भूस्खलन से व्यापक नुकसान दर्ज किया गया है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कई पुल और सड़कें बह गईं, जबकि जम्मू-कश्मीर में बार-बार बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएं हुईं।

आईएमडी ने अतिरिक्त बारिश के लिए मॉनसून की सक्रिय स्थिति को जिम्मेदार ठहराया है, जिसे लगातार पश्चिमी विक्षोभ से समर्थन मिला, जिससे क्षेत्र में वर्षा में वृद्धि हुई। मई में, मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि भारत में जून-सितंबर (मानसून के मौसम) के दौरान दीर्घकालिक औसत वर्षा (87 सेंटीमीटर) से छह प्रतिशत अधिक वर्षा होने की संभावना है।

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