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जबलपुर : हनुमानताल में टैंकरों से भरा जा रहा पानी, दुर्गा विसर्जन के लिए हो रही तैयारी

 
जबलपुर.
मध्य प्रदेश के जबलपुर में इस बार टैंकरों से तालाब भरा जा रहा है। शहर के बीचोंबीच स्थित ऐतिहासिक हनुमानताल तालाब को नगर निगम अब टैंकरों और बोरिंग की मदद से भर रहा है, ताकि दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन हो सके।

दरअसल, गर्मियों में नगर निगम ने तालाब की सफाई और जीर्णोद्धार के लिए इसे पूरी तरह खाली कर दिया था। इसके लिए लाखों रुपए खर्च किए गए। लेकिन बारिश के बावजूद तालाब पर्याप्त मात्रा में पानी से नहीं भर पाया। अब दशहरा से पहले नगर निगम उसे कृत्रिम रूप से भरने की कवायद में जुट गया है।

कमिश्नर का दावा, 2 दिन में हो जाएगा पर्याप्त पानी

नगर निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार के अनुसार, दुर्गा विसर्जन को ध्यान में रखते हुए रविवार को 10 टैंकर पानी तालाब में डाला गया और आसपास की चार बोरिंगों से भी पानी छोड़ा जा रहा है। सोमवार से टैंकरों की संख्या बढ़ा दी गई है। उम्मीद है कि दशहरा तक तालाब में पर्याप्त पानी हो जाएगा। महापौर जगत बहादुर अन्नू ने बताया कि शहर के पांच स्थानों पर दुर्गा विसर्जन की व्यवस्था की गई है। नर्मदा नदी के आसपास विसर्जन कुंड भी बनाए गए हैं, जहां नदी के जल से प्रतिमा विसर्जन होगा। वहीं, हनुमानताल में पानी की कमी को टैंकर और बोरिंग से पूरा किया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दो दिनों में पर्याप्त पानी तालाब में भर जाएगा।

शहर में पहली बार किसी तालाब को ऐसे भरा जा रहा

जबलपुर में पहली बार ऐसा हो रहा है, जब किसी तालाब को टैंकरों और चार बोरिंगों के जरिए भरा जा रहा है। दुर्गोत्सव समितियों ने नगर निगम से मांग की थी कि तालाब में पानी की पर्याप्त मात्रा नहीं है, जिससे विसर्जन में परेशानी हो रही है। गणेश विसर्जन के समय भी ऐसी ही स्थिति बनी थी, जब तालाब में पानी कम था।

नेता प्रतिपक्ष बोले- नगर निगम बना हंसी का पात्र

नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष अमरीष मिश्रा ने कहा, ऐतिहासिक हनुमानताल को सफाई के नाम पर गर्मी में खाली कराया गया, लेकिन निगम लेट-लतीफी के चलते समय पर काम पूरा नहीं कर सका। अब टैंकरों से तालाब भरना मजाक जैसा लग रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि हनुमानताल तालाब की सफाई के लिए करीब 2 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया था, लेकिन बिना पूरे काम के ही 90 लाख रुपए का बिल तैयार कर दिया गया था। हालांकि बाद में केवल 10 से 12 लाख रुपए का ही भुगतान किया गया।


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