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इंदौर के चूहा कांड पर हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश,सरकार ने कहा नवजातों की मौत रेट बाइट से नहीं हुई, ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ जिम्मेदार



इंदौर।  एमवाय अस्पताल में चूहों के कुतरने के बाद दो नवजातों की मौत के मामले में आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें शासन की ओर से विस्तृत रिपोर्ट पेश की गई है। जिसमें दोनों नवजातों की मौत रेट बाइट से नहीं होने का जिक्र है।

                                   धार निवासी दंपती के  जिस नवजात की मौत हुई है। उसकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी मौत कारण रेट बाइट नहीं, बल्कि उसके अन्य वे ऑर्गन्स नहीं हैं जो पूरी तरह विकसित नहीं हुए थे। इसके साथ ही दूसरी बीमारियां भी थी। रिपोर्ट में पेस्ट कंट्रोल एजाइल कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने संबंधी नोटिस दिए जाने का भी जिक्र है। खास बात यह कि फिर भी रेट बाइट की घटना को काफी गंभीरता से लिया गया है। यह भी माना गया कि भविष्य में ऐसी घटना न होए इसके लिए नवजातों से संबंधित पीआईसीयू, एनआईसीयू यूनिट्स को सरकारी सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में तुरंत अच्छे सेटअप के साथ शिफ्ट किया जाए। वहां भी इस तरह की घटनाओं लेकर विशेष सर्तकता रखी जाएगी। इसके साथ ही पीआईसीयू, एनआईसीयू यूनिट्स को सरकारी सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में शिफ्ट करने के दौरान तक इन दोनों यूनिट्स में फ्यूमीगेशन और पेस्ट कंट्रोल कराया जाए। रिपोर्ट में बताया गया कि पहली घटना 30 अगस्त की सुबह 4 बजे हुई थी, जबकि दूसरी घटना 31 अगस्त की रात 10.30 बजे हुई थी। इसमें यह देखा गया कि पहली घटना में क्या-क्या स्टेप्स लिए गए और क्या-क्या नहीं लिए गए। इसमें जिन्होंने घटना को लेकर रिपोर्ट नहीं की, उनकी भी गलती है और जिनकी उपस्थिति में गलती हुई हैं वे भी जिम्मेदार हैं। इसके लिए जो.जो विभागीय कार्रवाई की गई है। उसका जिक्र है।

जिम्मेदार अधिकारी हर हाल में नियमों का पालन करें-

सुनवाई के दौरान यह भी माना गया कि ऐसे उपाय होने चाहिए जिनसे शासन द्वारा जारी पैरामीटर्स और गाइडलाइन का पूरा पालन हो। इसके लिए यदि कोर्ट को अलग से कोई अथॉरिटी गठित करनी पड़े तो वह भी की जा सकती है। सभी जिम्मेदारों द्वारा इसका पालन करना अनिवार्य होना चाहिए। यह बात अति गंभीर मानी गई कि यह एक अप्रिय घटना है और दोबारा नहीं होनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि इसके लिए वर्तमान गाइडलाइन क्या हैं और आगे नया क्या होना चाहिए।

मामले में कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया था-

इस मामले में कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया था और शासन से स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा था। हाईकोर्ट ने इस प्रकरण में कई बिंदुओं पर सरकार से जवाब मांगा था। कोर्ट की टीम पहले ही अस्पताल के पीआईसीयू व एनआईसीयू का दौरा कर चुकी है। इस केस में 15 दिन बाद भी कठोर कार्रवाई न होने पर हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया था और 15 सितंबर तक स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। नोटिस जारी होने के बाद अस्पताल अधीक्षक डॉ अशोक यादव 11 से 25 सितंबर तक छुट्टी पर चले गए। न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति जेके पिल्लई की युगल पीठ ने नवजातों की मौत को मौलिक अधिकार और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए स्वत: संज्ञान लिया। कोर्ट ने यह भी कहा था कि सफाई और पेस्ट कंट्रोल संभालने वाली निजी कंपनी एजाइल सिक्योरिटी पर अब तक ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई जबकि इसी की लापरवाही से यह दर्दनाक हादसा हुआ।  हाईकोर्ट के रुख को देखते हुए प्रमुख सचिव (लोक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा) ने एजाइल कंपनी को हटाने के निर्देश दिए। साथ ही पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉण् बृजेश लाहोटी को पद से हटा दिया गया और प्रभारी एचओडी डॉ मनोज जोशी को निलंबित कर दिया गया।


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