गांव में दो पत्र मिले हैं। उसमें देवेंद्र उर्फ धदू को पुलिस मुखबिर बताया गया है। पत्र में लिखा है कि देवेंद्र ने माओवादी पार्टी दल की जानकारी 3-4 बार पुलिस को दी थी। वह डेरा ढूंढकर पुलिस को खबर देता था। पुलिस ने ही उसे जंगल में दहान के नाम से बैठाया था। वह पितकोना पुलिस चौकी वालों को दही-दूध भी पहुंचाता था। इन सभी आरोपों की जांच के बाद उसे मौत की सजा दी गई है। नक्सलियों ने ग्रामीणों को पुलिस मुखबिर न बनने की चेतावनी दी है। उन्होंने पत्र में कहा है कि ऐसे मुखबिरों को अपने-अपने गांव में सुधारा जाए।
दूसरे पत्र में पुलिस पर आरोप-
दूसरे पत्र में पुलिस पर आरोप लगाया गया है। लिखा है कि पुलिस गरीब लोगों को आपस में लड़वाकर मरवाने का काम करती है। पुलिस को सामंतवादी-साम्राज्यवादी ताकतों का रक्षक बताया गया है। जो गरीबों को लूटती है, विस्थापित करती है और विनाश करती है। इसलिए लोगों को पुलिस से दूर रहना चाहिए।
बालाघाट में पुलिस का मिशन 2026-
गौरतलब है कि बालाघाट पुलिस जिले में मिशन-2026 के तहत नक्सलियों के खात्मे के लिए लगातार दबाव बनाए हुए है। पुलिस जंगल में नक्सलियों के साथ-साथ लोगों के मन में व्याप्त नक्सली विचारधारा को खत्म करने और उनके नेटवर्क को तोडऩे में जुटी है।