पुलिस ने इस मामले में बाल कल्याण समिति के सदस्यों के घर पर दबिश दी है। समिति के सदस्य आशीष बॉस को गिरफ्तार किया गया है। अन्य सदस्यों के घर भी पुलिस पहुंची है। परिजन से की पूछताछ की गई है। वहीं महिला बाल विकास अधिकारी अवधेश कुमार सिंह को भी नोटिस दिया गया है। लवकुशनगर (छतरपुर) एसडीओपी नवीन दुबे ने बताया कि समिति और अधिकारियों के गलत फैसले से पीडि़ता को दोबारा दुष्कर्म का शिकार होना पड़ा। जांच में यह भी सामने आया कि जिला कार्यक्रम अधिकारी और वन स्टॉप सेंटर के कर्मचारियों ने मामले को दबाने की कोशिश की। गलत निर्णय करने वालों और मामले को छिपाने वालों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है। छतरपुर एएसपी विदिता डांगर का कहना है कि दुष्कर्म की एक घटना में बाल कल्याण समिति ने पीडि़ता को आरोपी की भाभी, जो कि पीडि़ता की चचेरी बहन थी, उसके सुपुर्द किया था। इस कारण आरोपी को जमानत में लाभ मिला। बाहर आने के बाद आरोपी ने फिर से पीडि़ता के साथ शारीरिक संबंध बनाए। मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
इन पर दर्ज हुई FIR-
-आरोपियों में बाल कल्याण समिति अध्यक्ष भानू जडिय़ा, सदस्य अंजलि भदौरिया, आशीष बोस, सुदीप श्रीवास्तव, प्रमोद कुमार सिंह पर पॉक्सो एक्ट की धारा 17 (अपराध को बढ़ावा देने पर) लगाई गई है।
-वन स्टॉप सेंटर प्रशासक कविता पांडे, काउंसलर प्रियंका सिंह व केस वर्कर शिवानी शर्मा पर पॉक्सो एक्ट की धारा 21 (बाल यौन अपराध में रिपोर्ट नहीं करने पर) दर्ज की गई है।
-जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी अवधेश सिंह पर पॉक्सो एक्ट धारा 21, एससी-एसटी एक्ट धारा 4 और बीएनएस की धारा 199 व 239 ;कानून के विपरीत काम करने परद्ध लगाई गई हैं।
-इसके अलावा अंजलि कुशवाहा पर किशोर न्याय अधिनियम की धारा 82 (बच्चों को शारीरिक दंड देने पर) में केस दर्ज हुआ है।
पन्ना पुलिस ने केस छतरपुर पुलिस को दिया
लड़की और आरोपी दोनों अलग-अलग गांव और जाति के हैं। आरोपी लड़की को दिल्ली की ले गया था, जहां गुरुग्राम से उसे पकड़ा गया। पन्ना कोतवाली में मामला दर्ज किया गया और डायरी जुझार नगर थाना भेज दी। छतरपुर पुलिस ने आरोपी को पकड़कर जेल भेज दिया। पन्ना में बाल सुधार गृह नहीं होने के चलते इस मामले की जांच छतरपुर पुलिस कर रही है।