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सेबी का निवेशकों के हित में बड़ा फैसला, म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स के ट्रांजैक्शन चार्ज अब खत्म

नई दिल्ली. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स को दिए जाने वाले ट्रांजैक्शन चार्ज को पूरी तरह खत्म कर दिया है। यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिससे अब एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (एएमसी) इस तरह का अतिरिक्त भुगतान नहीं करेंगी। यह फैसला मई 2023 में हुए सार्वजनिक परामर्श और जून 2025 में हुई उद्योग से बातचीत के बाद लिया गया है।

सेबी का मानना है कि यह बदलाव म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में पारदर्शिता को बढ़ावा देगा और डिस्ट्रीब्यूटर्स के भुगतान सिस्टम को सरल बनाएगा। यह सर्कुलर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 की धारा 11(1) और सेबी (म्यूचुअल फंड) विनियम, 1996 के विनियमन 52(4ए) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए निवेशकों के हितों की सुरक्षा, प्रतिभूति बाजार के विकास को बढ़ावा देने और उसे नियमित करने के उद्देश्य से जारी किया गया है। मार्केट रेगुलेटर सेबी के मुताबिक, अब तक लागू व्यवस्था के तहत डिस्ट्रीब्यूटर्स को 10,000 या उससे अधिक के निवेश लाने पर ट्रांजैक्शन चार्ज दिए जाते थे। यह नियम 27 जून 2024 के मास्टर सर्कुलर में शामिल था। हालांकि, नई समीक्षा के बाद सेबी ने पाया कि डिस्ट्रीब्यूटर्स, जो एएमसी के एजेंट की भूमिका निभाते हैं, उन्हें सीधे कमीशन या शुल्क के रूप में भुगतान किया जाना चाहिए, न कि ट्रांजैक्शन चार्ज के माध्यम से। इस आधार पर, मास्टर सर्कुलर के संबंधित प्रावधान अब पूरी तरह हटा दिए गए हैं।

बता दें कि म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर वे वित्तीय मध्यस्थ या निजी व्यक्ति होते हैं जो निवेशकों को म्यूचुअल फंड में निवेश करने और उसे बनाए रखने में मदद करते हैं। इन्हें अक्सर म्यूचुअल फंड एजेंट्स भी कहा जाता है। ये डिस्ट्रीब्यूटर व्यक्तिगत निवेशकों तक म्यूचुअल फंड उत्पादों की बिक्री और वितरण में अहम भूमिका निभाते हैं। बजाज फाइनेंस के मुताबिक, इन एजेंटों को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) और एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया यानी एएमएफआई द्वारा रजिस्टर और रेगुलेट किया जाता है।

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