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भारत के चेतक पर कहर बनकर टूटा चीन का रेयर अर्थ, इलेक्ट्रिक स्कूटर पर गहराया संकट

नई दिल्ली. चीन की तरफ से लगाए गए रेयर अर्थ मैग्नेट पर प्रतिबंधों का असर अब दिखने लगा है. देश के टॉप इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर मैन्युफैक्चरर में से एक बजाज पर रेयर अर्थ की कमी का प्रभाव हो रहा है. ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर के संघ एसआईएएस की ओर से जारी नए आंकड़ों से पता चला है कि बजाज ऑटो ने पिछले महीने कुल 10,824 इलेक्ट्रिक स्कूटर चेतक बनाए, जो जुलाई 2024 की 20,384 यूनिट के मुकाबले 9,560 याना सालाना आधार पर 47 प्रतिशत कम हैं. इतना ही नहीं, जुलाई का प्रोडक्शन जून 2025 के 18,479 यूनिट के मुकाबले भी 41 प्रतिशत कम है.

ये आंकड़े दिखते हैं कि बाजार में अच्छी मांग के बावजूद प्रोडक्शन में कमी आना निश्चित ही रेयर अर्थ की कमी का प्रभाव हो सकता है. बजाज ऑटो उन पहली भारतीय वाहन निर्माताओं में से एक थी, जिसने रेयर अर्थ मैग्नेट कमी से होने वाले प्रभाव को लेकर चेतावनी दी थी. रेयर अर्थ चुम्बकों का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटर, पावर स्टीयरिंग सिस्टम, जेनरेटर चुम्बक, डैशबोर्ड डिस्प्ले और एलईडी लाइट सिस्टम समेत कई जगह होता है. इतना ही नहीं इलेक्ट्रिक व्हीकल ईकोसिस्टम के कई अन्य घटक बनाने में इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है.

डीलरों को कम सप्लाई हुए स्कूटर

पिछले महीने फैक्ट्री उत्पादन में भारी गिरावट के कारण बजाज ऑटो के चेतक स्कूटर की डीलरों को की गई सप्लाई में साल-दर-साल 42 प्रतिशत की कमी आई है, जो घटकर 11,584 यूनिट रह गई. जुलाई 2024 में यह 20,114 यूनिट थी. यह इस साल का अब तक का सबसे कम आंकड़ा है. इससे पहले जून 2025 में 18,479 यूनिट सप्लाई हुई थी, जो इस साल की दूसरी सबसे कम मासिक सप्लाई रही थी.

इस महीने से सुधरेगा उत्पादन

अगर चीन से रेयर अर्थ मैग्नेट की सप्लाई संकट का हल नहीं निकला, तो अगस्त में भी उत्पादन में इसी तरह की गिरावट आ सकती है. बजाज ऑटो के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राकेश शर्मा ने एक महीने पहले कहा था, हमारा उत्पादन जून के अंत से प्रभावित होना शुरू हुआ. जुलाई में उत्पादन 50 प्रतिशत तक घट गया. हमें उम्मीद थी कि अगस्त में उत्पादन शून्य हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होगा. अगस्त का उत्पादन जुलाई से बेहतर रहेगा, हालांकि यह अभी भी तय योजना का करीब 50-60 प्रतिशत ही होगा.

समाधान खोज रही बजाज

भारी रेयर अर्थ मैग्नेट की भारी कमी के असर को कम करने के लिए बजाज ऑटो दो समाधान पर काम कर रहा है. हल्के रेयर अर्थ मैग्नेट का इस्तेमाल, जो आसानी से मिल जाते हैं और नई मैग्नेट तकनीक विकसित करना जिसमें रेयर अर्थ मटेरियल का इस्तेमाल ही न करना पड़े. हालांकि, दूसरी कंपनियों पर इतना असर नहीं है. एसआईएएम के आंकड़ों के मुताबिक, टीवीएस ने पिछले महीने 23,742 आईक्यूब बनाए, जो पिछले साल जुलाई के 22,348 यूनिट से 6 प्रतिशत ज्यादा है. एथर एनर्जी 16,148 ई-स्कूटर बनाए, जो 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी है.

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