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जिला शहर कांग्रेस कमेटी का मीटर ठेका कंपनियों पर प्रहार !


ज्ञापन सौंपा बताया- बिजली का मामला नहीं, बल्कि राष्ट्र् की सुरक्षा का प्रश्न है

जबलपुर। मध्य प्रदेश की स्मार्ट मीटर परियोजना में विदेशी कंपनी ‘अल्फानार’ की भागीदारी को लेकर शहर जिला कांग्रेस कमेटी, जबलपुर ने आज बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। संगठन ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम एक विस्तृत ज्ञापन अधीक्षण अभियंता (S.E.) सिटी सर्किल, जबलपुर को सौंपते हुए आरोप लगाया कि यह सिर्फ बिजली का मामला नहीं, बल्कि सीधे-सीधे राज्य और राष्ट्र की सुरक्षा का प्रश्न है।

सौरभ नाटी शर्मा ने कहा कि बिजली व्यवस्था सिर्फ बल्ब जलाने और पंखा घुमाने की चीज़ नहीं है यह अस्पतालों में जीवन रक्षक मशीनों से लेकर उद्योगों के उत्पादन, संचार नेटवर्क और रक्षा प्रतिष्ठानों तक की धड़कन है। यदि इस तंत्र में सेंध लगी, तो पूरे राज्य की नब्ज़ थम सकती है। दुनिया के कई देश इस खतरे का सामना कर चुके हैं, जहाँ साइबर हमलों से बिजली ग्रिड ठप हुए और शहर अंधेरे में डूब गए। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा—"ऑपरेशन सिंदूर" के समय विदेशी साइबर हमले हमारे बिजली नेटवर्क तक पहुँच गए थे, जिन्हें समय रहते रोका गया।

शर्मा ने चेतावनी दी कि भारतीय स्मार्ट ग्रिड फोरम (ISGF) पहले ही आगाह कर चुका है कि सऊदी अरब की ‘अल्फानार’ कंपनी, जिसमें पाकिस्तानी मूल के अधिकारियों की हिस्सेदारी है और जिसे तुर्की से आर्थिक सहयोग मिलता है, मध्य प्रदेश और पंजाब में स्मार्ट मीटर और मीटर डेटा प्रबंधन जैसी अत्यंत संवेदनशील परियोजनाओं पर काम कर रही है। तुर्की का पाकिस्तान को खुला समर्थन इस मामले को और संदिग्ध बनाता है। सवाल उठता है, क्या राज्य सरकार ने इस कंपनी को ठेका देने से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट ली थी?

स्मार्ट मीटर में सिर्फ बिजली का हिसाब नहीं होता, बल्कि उपभोक्ताओं का निजी डेटा, ग्रिड संचालन की गोपनीय जानकारी और GPS आधारित लोकेशन डेटा भी दर्ज होता है। अगर यह जानकारी गलत हाथों में चली गई, तो किसी भी नागरिक, संस्था या संवेदनशील प्रतिष्ठान का सटीक लोकेशन और बिजली सप्लाई पर नियंत्रण विदेशी ताकतों के हाथों में जा सकता है। ज़रा सोचिए—अगर एक बटन दबाकर किसी शहर का बिजली तंत्र ठप कर दिया जाए तो अस्पताल, उद्योग, रेलवे, हवाईअड्डे और रक्षा ठिकाने किस हालत में पहुँचेंगे?

"यह किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ व्यक्तिगत अभियान नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश और भारत की सुरक्षा की लड़ाई है। बिजली तंत्र में सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा।ज्ञापन में दिनेश यादव, अयोध्या प्रसाद तिवारी, अतुल बाजपेई, संतोष पंडा,मदन लारिया, गुड्डू तामसेतवार,गुड्डू नवी,जगतमणि चतुर्वेदी, डिक्की जॉन,  चमन पासी, सतेन्द्र चौबे, आरिफ बेग, रामदास यादव,  रविन्द्र कुशवाहा, अनुज श्रीवास्तव, राजकमल सोनी, विष्णु विनोदिया, रितेश बंटी गुप्ता, जगतमणि चतुर्वेदी, हुकुमचंद जैन, रवि रैकवार, कैलाश ठाकुर, संदीप जैन, सक्षम गिरी, गोस्वामी टीकाराम, कोस्टा रंभल विश्वकर्मा, सुरेंद्र यादव, अवधेश गुप्ता, रीतेश नोतनानी, रंजीत ठाकुर, विक्रम सिंह, अक्षय विनोदिया, भरत पटेल, इमराम हुसैन, राहुल कोरी, चंदन दुबे, जग्गू विश्वकर्मा, मनोज नामदेव, महेश मिलन, चंदन सोनकर, अखिलेश शर्मा, आलोक मसीहा, गोलू सेन, अतुल जोसफ मार्को, बाबा अशोक यादव, डब्बू मिश्राआदि भारी संख्या में कांग्रेस जन मौजूद थे!

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