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24 वर्षों से जल संरक्षण पर ' संगीत तपस्या '


दत्त मंदिर में गीतों की बारिश से मौसम हुआ सुहाना

जबलपुर। रिम झिम गिरे सावन के तहत 24 वर्षों से जल संरक्षण की दिशा में संगीत के माध्यम से तपस्या कर रहे सोलंकी ग्रुप ने रविवार की शाम दत्त मंदिर के ऑडीटोरियम में गीतों की ऐसी बारिश की है कि मौसम सुहाना हो गया। गीतों के माध्यम से बारिश का आगाज करते हुए ग्रुप के होनहार गायकों ने मधुर आवाज में गीतों की प्रस्तुति दी।

यह मौका था रविवार की शाम दत्त मंदिर के ऑडीटोरियम पर प्रतिवर्षानुसार रिम झिम गिरे सावन एक संगीतमयी प्रस्तुति का। इसका उद्देश्य जल संरक्षण था। यह आयोजन सन् 2011 से निरंतर शहर के कलाकारों द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इसमें गीतों की प्रस्तुतियों के साथ उद्घोषक पंकज सोलंकी द्वारा जल संरक्षण का संदेश दिया गया। आयोजन में गायक कलाकारों द्वारा बारिश के गीतों की प्रस्तुतिया दी। इनमें राजेन्द्र विश्वकर्मा द्वारा ' कुछ कहता है ये सावन ', प्रशांत सोनी ने ' जिन्दगी भर नहीं भूलेगी बरसात की रात ', विकास शर्मा ने ;' दिल में आग लगाए ', सारिका विश्वकर्मा ने ' ओ घटा सावरी ', शेखर शर्मा ने ' बरखा रानी ', रवि श्रीवास्तव ने ' पानी रे पानी ', कमलकांत उपाध्याय ने ' लगी आज सावन की ', दुर्गेश गर्ग ने ' मन करे याद वो दिन ', यश सालुंके ने ' मोहब्बत बरसा दे न तू ',  राजेश साळुंके ने ' दिल बेकरार सा ', निशिकांत फड़के ने ' सावन को आने दो ', प्रशांत पाठक ने ' बादल यू गरजता है ', किशोर तम्हाणे ने ' दिन ढल जाये रात न जाये ', डॉ अनिल बाजपेयी ने ' जाउं कहां बता ये दिल ' जैसे गीतों के अदभुद गायन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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