सिवनी। एक दुर्लभ प्रजाति का सांप पेंच टाइगर रिजर्व में देखने को मिला है। जो हरियाली के साथ ही पेड़ों में ऐसे छुपकर बैठा रहता है, जैसे पेड़ की पत्तियां और शाखाएं हैं। पेंच टाइगर रिजर्व के फॉरेस्ट गार्ड मनोज सल्लामे ने अपने कैमरे में एक दुर्लभ प्रजाति के सांप की तस्वीर कैद की है। जिसे पिट वाइपर (SENSOR SNAKE) कहा जाता है. खास तौर पर ये बरसात के सीजन में ही दिखाई देता है।
सर्प विशेषज्ञ डॉक्टर अंकित मेश्राम ने बताया कि "पिट वाइपर सांप पेड़ों में चढ़ने में माहिर तो होते ही हैं, साथ ही यह पेड़ों की शाखों से तेजी से नीचे गिर सकते हैं, या दूसरी शाखा पर फुर्ती से पहुंच सकते हैं। पिट वाइपर घात लगाकर शिकार करने वाला सांप कहा जाता है. यह झपट्टा मार कर शिकार करता है।"
डॉ मेश्राम ने बताया कि "पिट वाइपर के सिर पर विशेष गर्मी महसूस करने वाले गड्ढेनुमा सेंसर होते हैं. इसलिए इन्हें पिट वाइपर कहा जाता है। इनके आंख और नथुनों के बीच में गड्ढेनुमा पिट जो गर्म खून वाले शिकार को महसूस करता है। त्रिकोणक आकार का चौड़ा सिर और गर्दन पतली होती है. बिल्ली जैसी सीधी खड़ी पुतलियां, लंबे खोखले और अंदर मुड़ने वाले जहरीले दांत के साथ ही खुरदुरी त्वचा वाले पिट वाइपर कहलाते हैं।" पिट वाइपर ज्यादातर रात में एक्टिव होते हैं। पेड़ों और पत्तों में ऐसे घुल-मिल जाते हैं, जैसे किसी को दिखाई ना दें और घात लगाकर रात में ही शिकार करते हैं।
"बरसात के मौसम में ज्यादातर सांप काटने के मामले सामने आते हैं. ऐसे समय में लोगों को घबराने की बजाए सावधानी बरतने की जरूरत होती है। पिट वाइपर का जहर हिमोटॉक्सिक होता है. खून और ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है. सूजन, दर्द और घाव पैदा करता है।