जबलपुर। सावन के महीने में भगवान शंकर और नागों के बीच प्रेम और गहरा संबंध माना जाता है। भगवान शिव को नागों का देव माना जाता है और वे अपने गले में नागों को धारण करते हैं, जो शक्ति, सुरक्षा और परिवर्तन का प्रतीक है। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है, और इस दौरान नागों की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें नाग खुद भगवान शिव के मंदिर में पहुंच गए और और अंदर उनके गले में लिपट गए।
सावन का महीना भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना में एक विशेष स्थान रखता है। यह वह समय है जब धरती हरी चादर ओढ़ लेती है, आकाश सावन की फुहारों से सज उठता है और हर ओर हरियाली और शीतलता का एक अनुपम संगम दिखाई देता है। इस मौसम में न केवल प्रकृति खिल उठती है, बल्कि भक्तों के हृदयों में भी भोलेनाथ के प्रति अद्वितीय प्रेम और भक्ति का ज्वार उमड़ पड़ता है। सावन, शिव और प्रेम — यह त्रयी एक ऐसी अद्भुत रचना है, जिसमें भक्ति, सौंदर्य और आत्मीयता की गूंज समाहित है।
सावन आते ही जैसे धरती पर प्रेम की बरसात होने लगती है। हर पत्ता, हर फूल भीगता है, झूमता है, और जैसे आकाश से गिरती हर बूँद प्रेम का संदेश लेकर आती है। इस मौसम में कचनार के फूल खिलते हैं, मोर नाचते हैं, और पवन में भी एक मीठी सी सुगंध घुल जाती है। यह वही समय है जब प्रेमी अपने प्रिय के मिलन की आस में भीगते हैं, और विरह में तपते हृदयों को शीतल फुहारें सांत्वना देती हैं।
सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। कहते हैं, यही वह मास है जब शिव शंकर अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। काँवड़ यात्रा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक — हर क्रिया में प्रेम छिपा होता है, वह प्रेम जो भोले बाबा को समर्पित होता है। भगवान शिव का प्रेम अत्यंत सरल, निस्वार्थ और सहज है। वे न किसी आडंबर के इच्छुक हैं, न किसी भव्य पूजा के। वे तो मात्र सच्चे हृदय से निकली ‘ॐ नमः शिवाय’ की ध्वनि से ही प्रसन्न हो जाते हैं।