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अब हिन्दी भाषा में होगी डॉक्टरी की पढ़ाई


2027 से शुरू होगा अध्यापन, देश का पहला मेडिकल कॉलेज बना जबलपुर

जबलपुर। एमबीबीएस की डिग्री लेने के लिए छात्र-छात्राओं को अंग्रेजी अनिवार्य थी। पाठयक्रम में भी किताबें अंग्रेजी माध्यम से आती हैं, लेकिन अब मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के तहत जबलपुर में हिन्दी भाषा में पढ़ाई कराई जाने की तैयारी कर ली है। संभवतः यह पाठ्यक्रम 2027 से शुरू कर दिया जाएगा। 

कार्य परिषद ने भेजी डीपीआर

मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय की कार्य परिषद में एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें एमबीबीएस की पूरी पढ़ाई हिंदी में करवाने की तैयारी है। कार्य परिषद में इस प्रस्ताव को पास कर लिया और इसका डीपीआर बनाकर राज्य सरकार को भेजा है। शुरुआत में मेडिकल कॉलेज के लिए एक करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है। स्टाफ की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

पुस्तकों का अनुवाद का काम पूरा

मेडिकल के जानकार कहते हैं कि हिंदी मेडिकल कॉलेज में 50 सीटें होंगी। यह मेडिकल कॉलेज जबलपुर के सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के साथ ही खोला जाएगा। इसे 2027-28 से शुरू करने की तैयारी है। कॉलेज पूरी तरह से आवासीय होगा। मध्य प्रदेश मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अशोक खंडेलवाल ने बताया मेडिकल से जुड़ी कई पुस्तकों को हमने हिंदी में अनुवादित कर लिया है। हिंदी में इसकी पढ़ाई भी शुरू हो गई है। मेडिकल यूनिवर्सिटी ने हिंदी में एमबीबीएस करने वाले छात्र-छात्राओं को फीस में भी 50 प्रतिशत तक की छूट देने का प्रावधान रखा है।

एनएमसी से अनुमति अनिवार्य

इसके साथ ही हिंदी परीक्षा देने वाले छात्र-छात्राओं को लाख तक का पुरस्कार भी दिया जाएगा। कुलपति का कहना है कि केंद्र सरकार स्थानीय भाषाओं में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देना चाहती है। अभी तक भारत में कोई भी ऐसा कॉलेज नहीं है जो हिंदी में एमबीबीएस करवा रहा हो। इसके लिए अभी नेशनल मेडिकल काउंसिल से अनुमति लेनी होगी। अनुमति के बाद ही यह डिग्री कोर्स शुरू किया जा सकेगा। 

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