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ट्रांसफर पालिसी : प्रभारी मंत्री के पावर फिर वापिस लौटे

स्कूल शिक्षा की पॉलिसी में संशोधन : कलेक्टर से प्रभारी मंत्री के पास जाएगी लिस्ट, फिर डीईओ करेंगे जारी,जबलपुर में कहीं खुशी, कहीं गम

जबलपुर। स्कूल शिक्षा विभाग ने एक बार ट्रांसफर पॉलिसी में एक बार फिर से बदलाव करते हुए प्रभारी मंत्री की भूमिका बढ़ा दी है। अब जिले के भीतर प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से तबादले हो सकेंगे। सूची कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री तक अनुमोदन के लिए जाएगी। फिर ऑनलाइन ट्रांसफर जिला शिक्षा अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर से जारी होंगे। सरकार के संज्ञान में ये बात लाई गयी थी कि जिलों के भीतर सबसे ज्यादा आवेदन स्कूल टीचरों के ट्रांसफर के हैं,लेकिन प्रभारी मंत्री को कोई अधिकार ही नहीं है। जबलपुर में बदलाव से किसी का खेल  बुरी तरह से बिगड़ गया है तो किसी को खेल फिर से बनता हुआ दिखाई दे रहा है। विभाग ने अब संशोधन के साथ नई पॉलिसी जारी कर दी है। इसके मुताबिक 16 जून तक टीचरों के ट्रांसफर हो सकेंगे।

प्रशासकीय ट्रांसफर के प्रस्ताव 14 तक

जिला स्तर पर स्थानांतरण की अवधि में जिला संवर्ग में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के शासकीय सेवकों, जिनमें प्राथमिक शिक्षक, सहायक शिक्षक, प्राथमिक शिक्षक (विज्ञान), सहायक शिक्षक (विज्ञान), प्रधानाध्यापक प्राथमिक शाला, लिपिकीय वर्ग संवर्ग तथा भृत्य संवर्ग के लोक-सेवकों का जिले के भीतर स्थानांतरण जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद किया जा सकेगा। ऑनलाइन स्थानांतरण आदेश एजुकेशन पोर्टल 3.0 के माध्यम से जारी होंगे। कोई भी आदेश ऑफलाइन जारी नहीं होगा।

रिटायरमेंट में एक साल शेष, वे नहीं हटेंगे

जिले में 10 से कम नामांकन वाले किसी भी स्कूल में किसी भी शिक्षक का स्थानांतरण नहीं होगा। पारस्परिक स्थानांतरण समान पद एवं विषय होने पर ही होगा। इसी प्रकार 31 मई 2025 से एक वर्ष की समयावधि में रिटायर होने वाले शिक्षकों का पारस्परिक स्थानांतरण नहीं किया जा सकेगा। प्रभारी मंत्री के लिए भी पाबंदी स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी में उपरोक्त में जितने भी पदों का जिक्र है, उसके अलावा जितने भी संवर्ग हैं, उनके तबादले विभागीय मंत्री स्तर से होंगे।

बिचौलिया गैंग फिर सक्रिय

तारीख बढ़ने और नियमावली में बदलाव के बाद अब तबादले कराने का दावा करने वाले बिचौलिए एक बार फिर से बाजार में एक्टिव हो गये हैं। पुराने कायदों में जो लोग फिट नहीं बैठ रहे थे,उनके लिए अब नए नियम उम्मीद की नई किरण की तरह है और इसी का फायदा बिचौलिए खूब उठा रहे हैं। विभाग के अधिकारी बार-बार कह रहे हैं कि दलालों की दाल नहीं गल रही है,लेकिन या तो अफसर अंजान हैं या वे खुद सिस्टम की कमजोरी को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।

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