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गांव के 40 परिवारों का हुक्का-पानी बंद, दलितों को बाहर निकाला, प्रशासन की कोशिशें नाकाम

बैतूल के गांव चोहटा में चंदा नहीं देने पर बहिष्कार, मुनादी करवाई

बैतूल। मध्यप्रदेश में अभी भी कुप्रथा, ऊंच और नीच जाति के नाम पर गांव के बाहुबलि अत्याचार कर रहे हैैं। बैतूल के चोहटा गांव में एक छोटी सी बात पर 40 परिवारों को सामाजिक रूप से बेदखल कर दिया। मामला था एक आयोजन में चंदा देने का। इन लोगो ंने चंदा देने से मना कर दिया था, जिससे खफा होकर दूसरे पक्ष ने मुनादी करवाकर इन परिवारों का बहिष्कार कर दिया। अब इस मामले में प्रशासन बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है।

गांव चोहटा में 100 आदिवासियों ने रैली निकालकर लाउडस्पीकर से मुनादी कर घोषणा कि चिह्नित परिवारों से गांव का कोई व्यक्ति बातचीत नहीं करेगा। इससे हुआ यह कि अब इन परिवारों को दुकानों से सामान नहीं मिल रहा। चक्की पर आटा नहीं पिस रहा और बच्चे स्कूल जाने से डरने लगे हैं। सामाजिक बहिष्कार की वजह से पीड़ितों की सामान्य दिनचर्या ठप हो गई है। 

प्रशासनिक हस्तक्षेप बेअसर

मेहरा समाज संगठन के जिला अध्यक्ष संतु सूर्यवंशी, जिला संगठन मंत्री संदीप सूर्यवंशी, कमलेश बर्डे, हरीकिशोर नागले सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता गांव पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। फिलहाल प्रशासन गांव में शांति और सामंजस्य स्थापित करने की कोशिशों में जुटा है। 
पीड़ित परिवारों के गोलू बेले, कमलेश नागले और नामदेव नागले का कहना है कि सिर्फ एक छोटी सी बात को लेकर गांव में मुनादी की गई और दलित व अन्य समाज के लोगों को पूरी तरह से अलग.थलग कर दिया गया। जिला प्रशासन व पुलिस लगातार दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मुनादी करने वाले लोग किसी भी सामाजिक या प्रशासनिक समझाइश को मानने को तैयार नहीं हैं। ना तो सामाजिक संगठन और ना ही राजनीतिक प्रतिनिधियों की किसी बात का उन पर असर हो रहा है।


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