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19 साल बाद सड़कों पर फिर दिखेंगी सरकारी बसें, 7 शहर चयनित

बसों को चलाने का ब्लूप्रिंट तैयार, पीपीपी मोड पर चलेंगी सरकारी बसें

भोपाल/जबलपुर। 19 साल पहले राज्य परिवहन निगम के बंद होने के बाद से मध्य प्रदेश में परिवहन व्यवस्था बेपटरी हो गई है। निजी बस ऑपरेटर्स केवल उन्हीं मार्गों पर बसें दौड़ा रहे हैं, जिन मार्गों पर कमाई ज्यादा है। अब प्रदेश सरकार ने प्रदेश की जनता को निजी ऑपरेटर्स की लूट से बचाने के लिए पीपीपी मोड पर सरकारी बसें चलाने की योजना बनाई है। इसका ब्लूप्रिंट तैयार हो गया है। इसमें 7 शहरों का चयन कर लिया गया है।

ये हैं 7 शहर : प्रदेश में पीपीपी यानि पब्लिक प्राइवेट पाटर्नशिप के तहत बसें चलाने से पहले मार्गों का सर्वे किया जा रहा है। इनमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, रीवा और सागर जिले शामिल हैं। 

नो प्रोफिट-नो लास पर आधारित होगी सेवा : परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बताया कि मध्य प्रदेश में पीपीपी मोड पर बस चलाने का उद्देश्य प्रदेश की जनता को दूरस्थ अंचलों तक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। यह सर्विस पूरी तरह से नो प्रॉफिट-नो लास पर आधारित होगी। 

हर जिले में बनेगी कमेटी : अधिकारियों ने बताया कि मध्य प्रदेश में पीपीपी मोड पर बस संचालन की त्रिस्तरीय व्यवस्था होगी। सबसे पहले राज्य स्तर पर एक होल्डिंग कंपनी का गठन किया जाएगां। 7 शहरों में सरकारी बसों के लिए क्षेत्रीय परिवहन कंपनी का गठन किया जाएगा। हर जिले में जिला परिवहन कमेटी होगी, जिससे स्थानीय स्तर पर बसों की मॉनीटरिंग की जा सकेगी। 

सरकार नहीं खरीदेगी बस : सरकार पीपीपी मोड पर बसें चलाएगी यानि ये सभी बसें प्राइवेट ऑपरेटर्स से किराए पर ली जाएंगी। बस संचालन के लिए सरकार एक भी बस नहीं खरीदेगीं। वहीं, कंपनी को नुकसान न हो इसके लिए यात्रियों के साथ कार्गो परिवहन की सुविधा भी दी जाएगीं। इसके साथ ही लास्ट माइल कनेक्टिविटी और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए एप का निर्माण कराया जाएगां। जिसमें बस, मेट्रो, ई-रिक्शा, आटो और ई-बाइक को संकलित किया जाएगा।

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