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ग्वालियर में जगनापुरा की 100 करोड़ रुपए की जमीन कोर्ट में हार गई राज्य सरकार, हाईकोर्ट ने पुनर्विचार याचिका आधार बताकर खारिज की

 

ग्वालियर।  जगनापुरा ग्वालियर में 100 करोड़ रुपए से अधिक की बेशकीमती मंदिर की जमीन को राज्य शासन हाईकोर्ट में हार गया है। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सुनाए एक अहम फैसले में राज्य सरकार द्वारा दायर समीक्षा याचिका को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया है।

                               राज्य शासन ने जगनापुरा जमीन मामले में 20 मार्च 2024 को पारित आदेश की पुनर्विचार समीक्षा की मांग की थी। लेकिन हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने अब पुनर्विचार समीक्षा याचिका को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई आधार नहीं दिखता है जिस कारण यह याचिका स्वीकार कर समीक्षा की जाए। इस मामले में तत्कालीन संभागायुक्त ने कलेक्टर ग्वालियर को पत्र लिखकर जमीन को माफी की बताते हुए जांच करने के निर्देश दिये थे। ग्वालियर के बहोड़ापुर स्थित जगनापुरा में रामजानकी राधाकृष्ण मंदिर की 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की बेशकीमती 19.10 बीघा जमीन मामले में राज्य शासन को हाईकोर्ट में हार मिली है। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में सेवानिवृत न्यायाधीश एनके मोदी के पक्ष में कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए राज्य शासन की पुनर्विचार करने की मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि राज्य शासन व सरकारी अधिवक्ता ने समीक्षा का कोई ऐसा कोई आधार नहीं बताया जिसको ध्यान में रखते हुए आदेश वापस लिया जा सकें। इसीलिए न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश की समीक्षा करने का कोई कारण नजर नहीं आता है। जगनापुरा जमीन मामले में कोर्ट ने यह भी कहा कि अभिलेख में कोई कमी दिखाई नहीं देती है। जबकि इस मामले में राज्य शासन की ओर से तर्क दिया गया है कि रिट न्यायालय के समक्ष उत्तर दाखिल करने का कोई अवसर दिए बिना ही न्यायालय ने आदेश दिया है। जो अवैध है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतिम आक्षेपित आदेश में किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इस याचिका की सुनवाई न्यायाधीश मिलिंद रमेश फड़के द्वारा की गई है। गौरतलब है कि ग्वालियर शहर के बहोड़ापुर स्थित जगनापुरा के सर्वे क्रमांक 183,187, 482, 487, 492, 494, 498, 503, 524 की भूमि रामजानकी राधाकृष्ण मंदिर के नाम से थी। 27 जून 1966 को एक आदेश के बाद यह भूमि नियमित भूस्वामी के नाम से दर्ज की गई। इस भूमि को लेकर तत्कालीन संभागायुक्त दीपक सिंह ने ग्वालियर कलेक्टर को पत्र लिखा। जिसमें यह जमीन फिर से माफी औकाफ यानी मंदिर के नाम करने का आदेश दिया गयाए लेकिन दीपक सिंह के आदेश को सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज एनके मोदी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए दीपक सिंह का आदेश निरस्त कर दिया गया। इस याचिका की जब सुनवाई की गई थी तब शासकीय अधिवक्ता ने जवाब पेश करने के लिए समय नहीं मांगा। इस कारण आदेश शासन को बिना सुने फैसला हो गया। शासन ने अपने पक्ष रखने के लिए पुनर्विचार याचिका दायर की। जिसके बाद न्यायालय ने कहा कि अंतिम आदेश पारित करते समय राज्य की ओर से उपस्थित सरकारी अधिवक्ता ने दलीलों का जोरदार तरीके से उत्तर दिया था। उन्होंने उत्तर दाखिल करने के लिए समय नहीं मांगा था जो यह दर्शाता है कि उस समय राज्य शासन को उत्तर दाखिल करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। इसीलिए न्यायालय द्वारा जो आदेश दिये गए हैं उनमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इसलिए पुनर्विचार याचिका को खारिज किया जाता है।


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