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राम नवमी पर सनातन धर्म महासभा ने निकाली विशाल शोभायात्रा...

जबलपुर। मर्यादापुरुषोत्तम भगवान राम वनवासियों के भी राम हैं, वन के भी राम हैं। तुलसी के राम तो रणरंगधीर हैं, वे विजेता हैं। लेकिन विजित राज्य तत्क्षण लौटा भी देते हैं। वे कुटुंब और समाज के मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। सनातन धर्म महासभा द्वारा निकाली जाने वाली शोभायात्रा में भगवान राम की अलौकिक झांकियां कुछ ऐसा ही संदेश दे रहीं थीं। श्रीनृसिंहपीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नरसिंहदासजी महाराज के सानिध्य में निकाली गई। शोभायात्रा में शहर की विभिन्न मंदिरों की झांकियां भगवान राम के अलग-अलग स्वरूपों की शामिल रहीं। इस अवसर पर संत, महंत, राजनैतिक प्रतिनिधि, समाजसेवी और श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल रहे। शोभायात्रा का स्वागत विभिन्न संस्थाओं द्वारा किया गया।

50 से ज्यादा झांकियां रहीं शामिल
श्री सनातन धर्म महासभा के तत्वाधान में 43वीं श्री राम जी विशाल व भव्य शोभायात्रा सांयकाल 6 बजे पुराने मोटर स्टैंड से संतों के सानिध्य में निकाली गई। श्री राम मंदिर मदन महल की झांकी और विशालकाय बजरंगबली की सजीव झांकी भी शामिल रही। शोभायात्रा पुराने मोटर स्टैंड से प्रारंभ होकर मालवीय चौक, लॉर्डगंज, बड़ा फुहारा, कमानिया गेट, कोतवाली होते हुए गोविंदगंज रामलीला मिलोनीगंज में धर्म सभा के रूप में समाप्त हुई।
इनकी रही उपस्थिति
डॉ. स्वामी मुकुंददास जी महाराज, स्वामी रामजीशरण जी, सनातन धर्म महासभा के अध्यक्ष श्याम साहनी, अशोक मनोध्या, गुलशन मखीजा, चंद्र कुमार भनोट, अनिल तिवारी, मनोज शर्मा, हरीश सभरवाल, नरेंद्रपाल मलिक, विजय सरावगी, मोती लाल परवानी, डॉक्टर पवन स्थापक, अंजू भार्गव, नीता चावला, राजेंद्र इंदुलता प्यासी, महेश यादव, विष्णु पटेल, प्रवेश खेड़ा, डॉ. संदीप मिश्रा, आनंद चौबे, विनोद गोटिया शरद जैन, तरुण भनोट, जगत बहादुर सिंह अनु, विनय सक्सेना, कमलेश अग्रवाल, राममूर्ति मिश्रा, प्रभात साहू, आशीष दुबे आदि की उपस्थिति रही।
नवमीं पर देवी मंदिरों में उमड़ी श्रद्धा
चैत्र नवरात्र के महापर्व के अंतिम दिवस नवंमी पर देवी मंदिरों में सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की भारी संख्या में भीड़ उपस्थित रही। बड़ी खेरमाई, छोटी देवन, बूढ़ी खेरमाई, त्रिपुर सुंदरी, बरेला शारदा मंदिर, काली मंदिर सदर समेत शहर के तमाम देवी मंदिरों में कन्या भोजन के साथ वृहद आयोजन होते रहे। पूरे शहर में रामनवमीं, साईं जन्मोत्सव की धूम मची रही। जगह-जगह भंडारे का आयोजन किया जाता रहा।

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