भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) मध्य क्षेत्र की संगठनात्मक संरचना में अगले वर्ष मार्च से बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। इसके तहत मध्य प्रदेश के मौजूदा तीन प्रांतों- मध्य भारत, महाकोशल और मालवा का अलग-अलग अस्तित्व समाप्त कर एक राज्य इकाई बनाई जाएगी। नई व्यवस्था में प्रांतों की जगह राज्य प्रचारक होंगे और उनके अधीन संभागीय संगठन काम करेंगे।
एमपी में सात और छत्तीसगढ़ में दो संभाग
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मध्य प्रदेश में सात संभाग बनाए जाएंगे। इनमें भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, इंदौर, जबलपुर, रीवा और सागर शामिल हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ में रायपुर और बिलासपुर दो संभाग होंगे। इस तरह मध्य क्षेत्र में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की दो राज्य इकाइयों के अंतर्गत कुल नौ संभाग काम करेंगे। प्रत्येक संभाग में एक संभाग प्रचारक नियुक्त किया जाएगा, जो क्षेत्र प्रचारक के निर्देशन में कार्य करेगा।
राज्य प्रचारक के साथ राज्य कार्यवाह की भी जिम्मेदारी तय होगी। मार्च 2027 में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के बाद नई व्यवस्था लागू होने की संभावना है। इंदौर में हुई संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में संगठनात्मक ढांचे में इस बदलाव पर विचार किया गया था।
प्रशासनिक इकाइयों की तर्ज पर होगा ढांचा
नई संगठनात्मक संरचना प्रशासनिक इकाइयों के अनुरूप होगी। फिलहाल संघ में क्षेत्र और विभाग के बीच प्रांत की इकाई काम करती है। प्रस्तावित बदलाव के बाद प्रांत व्यवस्था समाप्त कर दी जाएगी। मध्य प्रदेश में अभी संघ की दृष्टि से मध्य भारत, मालवा और महाकोशल तीन अलग-अलग प्रांत हैं।
नई व्यवस्था में मध्य भारत के भोपाल और नर्मदापुरम को मिलाकर भोपाल संभाग तथा ग्वालियर और चंबल को मिलाकर ग्वालियर संभाग बनाया जाएगा। महाकोशल क्षेत्र में जबलपुर संभाग होगा, जबकि रीवा और शहडोल को मिलाकर रीवा संभाग प्रस्तावित है। बुंदेलखंड क्षेत्र में सागर, जबकि मालवा में इंदौर और उज्जैन संभाग बनाए जाएंगे।
विभागों के ऊपर होगी संभाग इकाई
मार्च 2027 में मौजूदा पदाधिकारियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई व्यवस्था प्रभावी होगी। वर्तमान मध्य भारत प्रांत के अंतर्गत भोपाल और ग्वालियर संभागों में आठ विभाग और 31 जिले आते हैं। संघ की संगठनात्मक गणना के अनुसार प्रदेश में जिलों की संख्या 90 से अधिक है, जबकि प्रशासनिक रूप से मध्य प्रदेश में 55 जिले हैं।
नई व्यवस्था में विभाग पहले की तरह बने रहेंगे, लेकिन उनके ऊपर संभागीय इकाई काम करेगी। प्रांत स्तर पर संचालित होने वाले संगठन के प्रमुख कार्य अब संभाग स्तर पर किए जाएंगे। राज्य स्तर पर प्रदेश कार्यसमिति होगी, जिसका नेतृत्व राज्य प्रचारक करेंगे। संगठन विस्तार और विभिन्न इकाइयों के बीच समन्वय की जिम्मेदारियां भी अलग-अलग निर्धारित की जाएंगी। माना जा रहा है कि इस बदलाव से संगठनात्मक समन्वय और कामकाज को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
