जबलपुर। धनतेरस के पावन पर्व पर मातृत्व और खुशियों का अनूठा संगम देखने को मिला, जहां शासकीय और निजी अस्पतालों में कुल 63 बेटियों ने जन्म लिया। शहर के प्रमुख सिविल एल्गिन अस्पताल में सुबह 4 बजे से रात 12 बजे के बीच कुल 28 नवजातों की किलकारी गूंजी, जिनमें 15 बेटियां और 13 बेटे शामिल रहे। इसके अतिरिक्त शहर के विभिन्न निजी अस्पतालों में भी 39 बेटियों और 27 बेटों का आगमन हुआ। मेडिकल कॉलेज, सूतिका गृह और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में भी प्रसव हुए। एल्गिन अस्पताल में पहली किलकारी दिन के 10:13 बजे गूंजी, जब रीना ने एक स्वस्थ कन्या को जन्म दिया। इस विशेष दिन अनुराधा, अर्चना यादव, माधवी, प्रमिला, सुमन, भारती, नेहा, ज्योति और रेखा सहित अनेक महिलाओं के घर बेटियों ने जन्म लेकर परिवारों को खुशियों से भर दिया।
एल्गिन अस्पताल में सामान्य प्रसव से जन्मी 11 कन्याएं
शासकीय एल्गिन अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं की चिकित्सा स्टाफ द्वारा निरंतर निगरानी और उचित देखभाल की जा रही है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यहां जन्म लेने वाली 15 कन्याओं में से 11 बेटियों का जन्म सामान्य डिलीवरी के माध्यम से हुआ है, जबकि शेष का प्रसव ऑपरेशन से कराया गया। सभी जच्चा और बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हैं। जैसे ही नर्सों ने प्रसव कक्ष से बाहर आकर परिजनों को बेटी होने की सूचना दी, पूरे परिसर में उत्साह का माहौल बन गया। अस्पताल की स्टाफ नर्सों ने भी सभी माताओं को इस शुभ दिन पर कन्या रत्न की प्राप्ति के लिए शुभकामनाएं दीं।
पारंपरिक नामों से नवजात बेटियों का नामकरण
धनतेरस के दिन लोग आमतौर पर सोने-चांदी और सुख-समृद्धि की खरीदारी करते हैं, लेकिन इन परिवारों ने अपनी नवजात बेटियों को ही साक्षात मां लक्ष्मी का स्वरूप माना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पर्व पर कन्या का आगमन बेहद सौभाग्यशाली माना जाता है। नवजात बच्ची की दादी शीला ने बताया कि रीना और उनके बेटे प्रतीक ने डिलीवरी से पहले ही घर में बेटी आने की प्रार्थना की थी, जो ईश्वर ने पूरी कर दी। खुशियों से उत्साहित परिजनों ने अपनी लाड़लियों के नाम धनलक्ष्मी, शव्या, भाग्यश्री, नंदिका, वैष्णवी, अदित्री, सुरभि, श्रद्धा, कल्याणी, वसुधा, उर्वी, त्रिसिखा, सुदीक्षा और लक्ष्मी रखने का निर्णय लिया है।
