जबलपुर। जिले के बरगी क्षेत्र के शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल सगड़ा-छपनी में पदस्थ राजनीति विज्ञान शिक्षक संतोष पटेल, राममिलन पटेल, अशोक पटेल और राजेश पटेल पर नाबालिग छात्रा को आत्महत्या के लिए उकसाने पर बरगी पुलिस चौकी ने केस दर्ज किया था। पुलिस ने 10 महीने की जांच पूरी करके 19 अगस्त 2026 को चारों को जेल भेज दिया। जेल जाने से पहले संतोष पटेल ने स्कूल हाजिरी रजिस्टर में बीमारी की झूठी अर्जी लगाई और गिरफ्तारी की बात छिपाई। लगभग 10 दिन जेल में रहने के बाद रिहा होकर वे बिना रोक-टोक सीधे छात्रों को पढ़ाने लगे। शिक्षा विभाग के अफसरों को करीब डेढ़ माह तक इस कार्रवाई का पता नहीं चला। सगड़ा-छपनी स्कूल की प्राचार्या ने 3 सितंबर को जिला शिक्षा अधिकारी गौतम बर्वे को पत्र भेजा।
कैमरे के फुटेज दिखाकर पंचायत में मांगा जुर्माना
शिक्षक ने 15 अक्टूबर 2025 को कैमरे लगवाकर 17 वर्षीय किशोरी का वीडियो गुपचुप तरीके से रिकॉर्ड कराया था। इसके बाद 19 अक्टूबर 2025 को रिश्तेदारों और परिजनों की सभा बैठाई गई। बड़ी स्क्रीन पर फुटेज चलाकर लड़की पर चोरी के आरोप लगाए गए और चरित्र पर लांछन मढ़े गए। भरी सभा के बीच किशोरी के पिता से नुकसान की भरपाई के नाम पर 3 लाख रुपए की मांग रखी गई। इस सार्वजनिक अपमान से दुखी होकर किशोरी ने 10 नवंबर 2025 को बरगी स्थित अपने मामा के घर में जहरीला पदार्थ खा लिया। परिजन उसे तुरंत बरगी स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से शहर के निजी अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उसकी सांसें थम गईं। लार्डगंज पुलिस ने शुरुआत में मर्ग कायम किया, जिसे बाद में घटनास्थल के आधार पर बरगी थाने को सौंपा गया।
शिक्षा विभाग करेगा आरोपी शिक्षक पर निष्पक्ष जांच
अदालत से जमानत पर बाहर आने के बाद शिक्षक ने अपने बचाव में लिखित आवेदन देकर इसे पारिवारिक रंजिश का झूठा मुकदमा बताया था। स्कूल प्रबंधन की चिट्ठी 8 सितंबर 2026 को शिक्षा दफ्तर में दर्ज हुई थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि सभा में झूठे लांछन और वीडियो प्रदर्शन के कारण ही पीड़िता ने जानलेवा कदम उठाया था, जिसके ठोस सुबूत मिलने पर सभी नामजद गिरफ्तारियां की गई थीं। उधर जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि शिक्षक के जेल जाने और पत्र मिलने की बात उनके ध्यान में नहीं थी, इसलिए अब पूरे मामले की पूरी पड़ताल कराई जाएगी ताकि नियमों के तहत आगे का कदम उठाया जा सके।
