जबलपुर। जिले में लंबे अंतराल के बाद बीते 2 दिनों के दौरान हुई बारिश ने दम तोड़ती धान की फसल को नया जीवनदान दिया है। खेतों में पर्याप्त नमी पहुंचने से अन्नदाताओं के चेहरों पर चमक लौट आई है और बेहतर पैदावार की उम्मीद जग गई है। किसानों के अनुसार पिछले लगभग 1 माह से अनुकूल पानी न गिरने की वजह से ग्रामीण इलाकों में जमीन की नमी तेजी से खत्म हो रही थी, जिसका सीधा असर धान के पौधों पर दिखाई दे रहा था। बालियां निकलने के नाजुक दौर में इस प्राकृतिक सिंचाई ने सूखते पौधों को सबसे बड़ा सहारा दिया है। इससे दाना बनने की प्रक्रिया को गति मिलेगी। इसके अलावा मौसम के इस सकारात्मक बदलाव ने क्षेत्रीय सब्जी उत्पादकों को भी कृत्रिम सिंचाई की भारी मशक्कत से राहत दिला दी है।
नमी से बालियों में बेहतर दाना भरने की उम्मीद
कृषि जानकारों और काश्तकारों का मानना है कि धान के पौधों में बालियां आने के दौरान खेतों में पानी की मात्रा तथा नमी का संतुलन बना रहना सबसे अनिवार्य शर्त होती है। यदि इस निर्णायक समय पर आसमान से मेघ नहीं बरसते, तो पौधों में दाना भरने की स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया पूरी तरह बाधित हो जाती और फसल थोथी रह जाती। बीते 48 घंटों में हुई वर्षा से मिट्टी के भीतर तक जरूरी पानी पहुंच चुका है। जमीन में यह तरलता बरकरार रहने से बालियों का आकार सुधरेगा और दानों में ठोस भराव संभव होगा। इससे उत्पादन घटने की चिंता से जूझ रहे किसानों को अपनी लागत और मेहनत सुरक्षित होने का ठोस भरोसा मिला है।
सब्जी उत्पादकों को सिंचाई की लागत से मुक्ति
इस मानसूनी फुहार का अनुकूल प्रभाव सिर्फ मुख्य खाद्यान्न तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हरी सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के लिए भी यह वरदान साबित हुई है। लगातार धूप और सूखे की मार झेल रहे सब्जी के बागीचों में मिट्टी नम होने से पौधों का विकास तेज होगा। कृषकों को ट्यूबवेल और पंप चलाकर बार-बार पानी देने के खर्च तथा श्रम से निजात मिल गई है। स्थानीय उत्पादक मानते हैं कि वातावरण में आई यह ठंडक और नमी सब्जियों की गुणवत्ता और बढ़वार दोनों के लिए मुफीद रहेगी।
