जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में कुलगुरु कार्यालय और कुलसचिव कार्यालय के बीच छिड़ी प्रशासनिक खींचतान अब खुलकर सतह पर आ गई है। दोनों उच्च पदों के मध्य शुरू हुए स्पष्टीकरण पत्र और जवाब-तलब के सिलसिले ने परिसर का सामान्य कामकाजी माहौल पूरी तरह बिगाड़ दिया है। कुलसचिव ने कुलगुरु सचिवालय के कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए, तो पलटवार करते हुए कुलगुरु सचिवालय ने खुद कुलसचिव को कारण बताओ पत्र जारी कर दिया। इस दोतरफा तकरार के चलते आगामी सेमेस्टर और वार्षिक परीक्षाओं की गोपनीय शाखा से लेकर सामान्य प्रशासनिक तंत्र तक की रफ्तार थम गई है। दोनों शीर्ष अधिकारियों की इस अंतर्कलह के कारण पूरे महाकोशल अंचल से उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है।
अधिकारियों की रार में अटकीं आगामी सेमेस्टर परीक्षाएं
वार्षिक और सेमेस्टर परीक्षाओं के आयोजन की तय समय-सीमा सिर पर है, किंतु प्रशासनिक तालमेल टूटने से परीक्षा संचालन व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गई है। गोपनीय विभाग में परीक्षा केंद्र निर्धारण, प्रश्नपत्र मुद्रण की तैयारी, आवेदन पत्रों की अंतिम जांच और प्रवेश पत्र मुद्रण से जुड़ी आवश्यक पत्रावलियां आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। दोनों प्रमुख पदों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर जारी गतिरोध के चलते लिपिकीय अमला भी किसी संचिका पर अंतिम निर्णय लेने से हिचक रहा है। संकायों में प्रायोगिक परीक्षाओं के कार्यक्रम तय नहीं हो सके हैं, जिससे शिक्षण सत्र में भारी देरी होने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
दफ्तरों के बीच भटक रहे दूरदराज के विद्यार्थी
संभागीय मुख्यालय स्थित इस उच्च शिक्षण संस्थान में रोजाना 1 या 2 दिन का सामान्य काम कराने पहुंचे विद्यार्थियों को हफ्तों चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उपाधि पत्र, मूल अंकसूची, प्रव्रजन प्रमाण पत्र और परीक्षा परिणाम की गड़बड़ी दुरुस्त कराने के लिए कटनी, मंडला, डिंडोरी और नरसिंहपुर जैसे सुदूर जिलों से पहुंचे छात्र खिड़कियों पर कतारें लगा रहे हैं। दोनों शीर्ष कार्यालयों में किसी भी आवेदन पर समय पर स्वीकृति न मिलने से बाबू पल्ला झाड़ रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के अवसर तलाश रहे युवाओं के समक्ष अंतिम समय-सीमा खत्म होने का संकट खड़ा हो गया है।
उच्च शिक्षा विभाग करे त्वरित दखल
परिसर में गहराते इस गतिरोध पर प्रबुद्ध नागरिकों, प्राध्यापकों और छात्र प्रतिनिधियों ने गहरी चिंता जताते हुए मध्य प्रदेश शासन से तुरंत संज्ञान लेने की मांग उठाई है। विधि विशेषज्ञों के अनुसार विश्वविद्यालय परिनियम में कुलगुरु और कुलसचिव दोनों के अधिकार तथा दायित्व पूरी तरह स्पष्ट रूप से परिभाषित हैं, किंतु संवादहीनता के चलते संवैधानिक व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। राज्य के उच्च शिक्षा विभाग को दोनों पक्षों के बीच तुरंत समन्वय समिति गठित कर प्रशासनिक कामकाज बहाल कराना चाहिए, ताकि शैक्षणिक कैलेंडर पटरी पर लौटे और विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखा जा सके।
