मामले की जांच में सामने आया है कि वर्ष 2022 से 2025-26 के बीच ग्राम पंचायत ने करीब 2.26 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि निकाली। अधिकारियों ने मौके पर जाकर निर्माण कार्यों की जांच की तो सिर्फ 98.94 लाख रुपए का काम ही मिला। कई कार्य अधूरे पाए गए, जबकि उनकी राशि पहले ही निकाली जा चुकी थी। ग्राम जमुनिया में पीएम सड़क से अमृत सरोवर की ओर बनने वाली सीसी सड़क के लिए 14.99 लाख रुपए की पूरी राशि निकाल ली गई थी। जांच में मौके पर इस सड़क का कोई काम नहीं मिला। अधिकारियों ने पूरी राशि को गबन मानते हुए इसकी वसूली की कार्रवाई करने की बात कही है। पंचायत में अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद स्ष्ठरू की अगुवाई में टीम ने जांच की थी। रिपोर्ट के आधार पर सरपंच और सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। सरपंच ने अपने जवाब में दावा किया कि पंचायत के सभी काम पूरे हो चुके हैं। इसके बाद जिला स्तर पर दूसरी टीम बनाकर दोबारा जांच कराई गई। इस जांच में भी कई निर्माण कार्य अधूरे मिले और यह सामने आया कि उनकी राशि पहले ही निकाल ली गई थी।
पति के नाम से लगाए थे बिल-
जांच रिपोर्ट में सामान खरीदी के नाम पर भी अनियमितता सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार पंजीकृत दुकानदारों और वेंडरों को भुगतान करने के बजाय सरपंच ने अपने नाम, पति के नाम और बिना जीएसटी नंबर वाले ट्रेडर्स के बिल लगाकर पंचायत के खाते से राशि निकाली। जांच में इसे भंडार क्रय नियमों का उल्लंघन मानते हुए सरकारी धन के उपयोग में गंभीर अनियमितता माना गया है।