सैलरी में करीब 15 से 20 हजार रुपए तक का इजाफा और 10 साल का एरियर मिलने का रास्ता भी खुल सकता है। राज्य सरकार की स्रुक्क सुप्रीम कोर्ट 24 अगस्त को खारिज कर चुका है। इसके बाद दायर अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट ने यह समय दिया है। अगली सुनवाई 21 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। अवमानना मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक खोट की सिंगल बेंच में हुई। सरकार की ओर से आदेश का पालन करने के लिए समय मांगा गया, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र आर्य और सरकार की ओर से एएस बघेल ने पक्ष रखा।
2006 से मिलना था छठे वेतनमान का लाभ-
शिक्षकों का कहना है कि छठा वेतनमान 1 जनवरी 2006 से लागू हुआ था, लेकिन उन्हें इसका लाभ 2016 से दिया जा रहा है। उनका तर्क है कि पहली नियुक्ति से सेवा जोडऩे पर 2006 से ही वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए। इससे 10 साल का बकाया बन सकता है। शिक्षकों के मुताबिक, प्रत्येक शिक्षक को करीब 7 से 8 लाख रुपए तक मिल सकते हैं। इस पर 12त्न ब्याज दिए जाने की बात भी सामने आई है। इससे मासिक वेतन में करीब 15 से 20 हजार रुपए तक का अंतर पड़ सकता है।
497 शिक्षकों ने शुरू की थी कानूनी लड़ाई-
राजेश पांडेय समेत 497 शिक्षकों ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। उनका कहना था कि सरकार ने शिक्षा विभाग में संविलियन के लिए 2018 से पहले की उनकी शिक्षकीय सेवा को मान्यता नहीं दी। शिक्षकों ने मांग की कि नौकरी की अवधि पहली नियुक्ति से मानी जाए, ताकि उसी आधार पर उन्हें सीनियरिटी, वेतन बढ़ोतरी, पेंशन और दूसरे लाभ मिल सकें।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती-
हाईकोर्ट के शिक्षकों के पक्ष में फैसले के बाद राज्य सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार की ओर से एसपीएल दाखिल की गई, जिसे 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद शिक्षकों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका लगाकर आदेश का पालन कराने की मांग की।