कटनी के कुठला थाने में CSP नेहा पच्चीसिया के खिलाफ पद के दुरुपयोग, धोखाधड़ी और जबरन जमीन हड़पने की धाराओं में केस दर्ज है। इस मामले में निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया, मुख्य फाइनेंसर क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ हनफी फरार हैं। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे और अधिवक्ता प्रियंक अग्रवाल ने दलील दी कि नेहा पच्चीसिया को दुर्भावना से फंसाया गया है। दर्ज FIR में उनके खिलाफ कोई सीधी भूमिका या अपराध होना नहीं दिखता। उनका अन्य सह-आरोपियों के साथ कोई सीधा संबंध या सांठगांठ नहीं है। वकीलों ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता दो छोटे बच्चों की एकल अभिभावक हैं। इस कार्यवाही के कारण वे अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियां नहीं निभा पा रही हैं। उन्होंने मांग की कि याचिका पर अंतिम फैसला आने तक किसी भी कठोर या दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। राज्य सरकार और अभियोजन पक्ष ने अंतरिम राहत का कड़ा विरोध किया। अतिरिक्त महाधिवक्ता एच.एस. रूपराह और शासकीय अधिवक्ता अमित पांडेय ने दलील दी कि आरोपी अधिकारी लगातार फरार हैं और पुलिस जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। हालांकि कोर्ट ने माना कि अंतरिम या अंतिम राहत पर कोई भी आदेश देने से पूर्व राज्य का पक्ष रिकॉर्ड पर आना अनिवार्य है। हालांकि, बच्चों की परवरिश से जुड़े मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने सुनवाई की अगली तिथि 21 सितंबर 2026 निर्धारित की है, जिस दिन अंतरिम राहत के आवेदन पर विचार किया जाएगा।
18 लाख में खरीदी करोड़ों रुपए की जमीन-
आरोप है कि कुठला थाना क्षेत्र में हत्या के एक मामले में आरोपी को फायदा पहुंचाने के इरादे से चालान (चार्जशीट) पेश करने में देरी की गई। इसके बाद आरोपी के परिवार पर दबाव बनाया गया। लगभग 1 से 2 करोड़ रुपए की जमीन को सिर्फ 18-20 लाख रुपये में अपने सहयोगियों के नाम ट्रांसफर करा लिया गया।
CSP है दस हजार का इनाम घोषित-
विभागीय जांच के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर CSP नेहा पच्चीसिया को निलंबित कर दिया गया था। पुलिस ने उन पर 10,000 रुपए का इनाम भी घोषित किया है। उनके विदेश भागने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने लुकआउट सर्कुलर जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।