नई दिल्ली. अगर आपकी शाम की महफिल या वीकेंड की पार्टी में ओल्ड मोंक, रॉयल चैलेंज, एंटिक्विटी ब्लू या बैगपाइपर डीलक्स जैसे मशहूर ब्रांड्स का नाम सबसे पहले आता है, तो यह खबर आपको तगड़ा झटका दे सकती है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने गुणवत्ता मानकों की अनदेखी के आरोप में इन लोकप्रिय शराब ब्रांड्स की कुछ वैरायटी की बिक्री पर सख्त पाबंदी लगा दी है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के खुलासे के बाद शराब कंपनियों पर यह बड़ी कार्रवाई की गई है, जिससे पीने के शौकीनों के बीच हड़कंप मच गया है।
स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए चल रहा था यह खेल
इस पूरी कार्रवाई के पीछे का मुख्य कारण शराब में मिलाए जा रहे कृत्रिम फ्लेवर हैं। जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इन शराब उत्पादों का स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए कंपनियों ने ऐसे फ्लेवर्स का इस्तेमाल किया, जो तय सरकारी नियमों के बिल्कुल खिलाफ हैं। एफएसएसएआई ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि असली शराब का स्वाद और महक प्राकृतिक सामग्री और उसे एक तय समय तक सहेज कर रखने (मैच्युरेशन) की सही प्रक्रिया से आनी चाहिए। अलग से व्हिस्की में व्हिस्की फ्लेवर और रम में रम फ्लेवर मिलाना दुनिया भर में शराब बनाने का सही तरीका नहीं माना जाता है। इसी शॉर्टकट के चलते इन उत्पादों को तय मानकों से नीचे का मानकर बैन किया गया है।
कार्रवाई की जद में आए ये बड़े नाम
खाद्य नियामक की इस सख्त कार्रवाई की गाज फिलहाल कुछ चुनिंदा राज्यों की फैक्ट्रियों में बनी शराब की खेप पर गिरी है। जांच के दायरे में मध्य प्रदेश की फैक्ट्रियों में तैयार की गई एंटिक्विटी ब्लू व्हिस्की, रॉयल चैलेंज व्हिस्की, बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की और ओल्ड कास्क डीलक्स ट्रिपल एक्स रम शामिल हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र की यूनिट में बनी ओल्ड मोंक की तीन अलग-अलग वैरायटी पर भी एक्शन लिया गया है। हालांकि, शराब बनाने वाली इन प्रमुख कंपनियों यूनाइटेड स्पिरिट्स, इनब्रू बेवरेजेज और मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर की तरफ से अभी तक इस बड़े विवाद पर कोई भी आधिकारिक बयान या सफाई सामने नहीं आई है।
क्या हर जगह बैन हो जाएगी शराब?
इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन ब्रांड्स की हर बोतल की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। आपको बता दें कि अभी तक यह पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया है कि यह पाबंदी सिर्फ इन विशेष फैक्ट्रियों में बनी बोतलों तक ही सीमित रहेगी या फिर पूरे देश में बिकने वाले इन उत्पादों पर लागू होगी। फिलहाल यह बैन केवल कुछ खास मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के उत्पादों पर ही लगाया गया है। आने वाले दिनों में स्नस्स््रढ्ढ की ओर से विस्तृत गाइडलाइन और जानकारी मिलने के बाद ही इस मामले की पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी।
