हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को 7 दिन के भीतर प्रदेश के बाहर के विशेषज्ञों की समिति गठित करने का दिया निर्देश
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्यभर में पिछले पांच वर्षों के दौरान तैयार की गई डीएनए और अन्य वैज्ञानिक रिपोर्टों में से 20 प्रतिशत नमूनों की गहराई से जांच कराने का ऐतिहासिक आदेश पारित किया है। डिवीजन बेंच ने मुख्य सचिव को यह सख्त निर्देश दिया है कि सात दिन के भीतर प्रदेश के बाहर के वरिष्ठ विशेषज्ञों की एक विशेष समिति का गठन किया जाए जो इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच करे। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई के लिए चौदह अगस्त की तारीख तय की गई है। यह आदेश नर्मदापुरम जिले के इटारसी निवासी पंकज कुमार बिंदोलिया की तरफ से दायर की गई एक आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान दिया गया। अपीलकर्ता ने पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत द्वारा सोलह मार्च 2026 को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के निर्णय को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह गंभीर तथ्य सामने आया कि इकतीस दिसंबर 2024 को एफएसएल भोपाल द्वारा जारी की गई एक डीएनए रिपोर्ट में किसी अन्य व्यक्ति का गलत नाम दर्ज कर दिया गया था। इस गंभीर लापरवाही पर डिवीजन बेंच ने एफएसएल की प्रभारी निदेशक को अदालत में तलब किया था। एफएसएल की प्रभारी निदेशक डॉ. हर्षा सिंह ने अदालत के समक्ष यह स्वीकार किया कि रिपोर्ट तैयार करते समय कट-पेस्ट की गलती के कारण गलत व्यक्ति का नाम दर्ज हो गया था। इस बड़ी त्रुटि को संज्ञान में लेते हुए अदालत ने पूरे प्रदेश में पांच साल की वैज्ञानिक और डीएनए रिपोर्टों का ऑडिट करने का आदेश दिया है।
