जबलपुर। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में जारी की गई सहायक प्राध्यापकों की वरिष्ठता सूची से प्रदेश के शिक्षकों में जबरदस्त नाराजगी फैल गई है। इस सूची में केवल वर्ष 2012 तक के सहायक प्राध्यापकों को ही शामिल किया गया है, जिसके विरोध में प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ जबलपुर संभाग की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए संभागीय अध्यक्ष प्रो.अरुण शुक्ल ने स्पष्ट किया कि अन्य विभागों में पदोन्नति नियम 2025 के तहत वर्ष 2025 तक के सभी लाभ दिए जा रहे हैं, जबकि उच्च शिक्षा विभाग में आज भी 10 से 15 साल पुराने लंबित मामलों को ही खींचा जा रहा है। विभाग की इस सुस्ती और उदासीनता के कारण प्राध्यापकों को मजबूरी में अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। इस मौके पर डॉ. शैलेन्द्र श्रीवास्तव, डॉ. राजीव मिश्रा, डॉ. एसी तिवारी, डॉ. रामेश्वर झारिया, डॉ. शिवचंद्र वल्के, डॉ रविश तमन्ना ताजिर और डॉ. जागेश्वर प्रजापति सहित कई वरिष्ठ शिक्षक उपस्थित रहे जिन्होंने इस व्यवस्था पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
पदोन्नति में देरी से भारी आक्रोश
प्राध्यापकों का कहना है कि उच्च शिक्षा विभाग के पुराने और अव्यवहारिक रवैये के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ रहा है। समय पर पदोन्नति और वेतनमान न मिलने से शिक्षकों का मनोबल गिर रहा है और उनमें प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर गहरा असंतोष व्याप्त है।
मुख्यमंत्री से त्वरित हस्तक्षेप की मांग
संघ के पदाधिकारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री से यह जोरदार अपील की है कि वे संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दें। मांग की गई है कि पदोन्नति नियम 2025 के तहत सभी पात्र प्राध्यापकों को उनके तय मापदंडों के अनुसार समयबद्ध तरीके से पदोन्नति का लाभ दिया जाए और नियमों में आवश्यक सुधार किए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
