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रसूखदारों ने उजाड़ी गरीब की फसल, डरा-सहमा आदिवासी पीड़ित परिवार पहुंचा पुलिस की शरण में



फेंसिंग तोड़कर खंभे गाड़ने और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का मामला पहुंचा तिलवारा थाने

जबलपुर। तिलवारा थाना क्षेत्र के रामपुर नकटिया स्थित ग्राम ऐंठाखेड़ा में जमीन पर कब्जे का गंभीर मामला सामने आया है। यहां रहने वाली आदिवासी महिला रज्यन्ति सैयाम पति चंद्र सिंह सैयाम ने भाई लाल यादव, गुल्लू यादव और उनके साथ आए 40 से 50 समर्थकों पर खेत में जबरन घुसकर कब्जे की कोशिश का आरोप लगाया है। पीड़िता ने तिलवारा थाना प्रभारी को लिखित शिकायत देकर बताया कि 27 मई 2026 को दोपहर करीब 1 बजे इन लोगों ने उनके खेत की फेंसिंग तोड़ दी और नापजोख का हवाला देकर खंभे गाड़ने लगे। विरोध करने पर आरोपियों ने गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की। पीड़िता ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और अपने परिवार के लिए सुरक्षा की मांग की है।

​दबंगों द्वारा जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने और जान से मारने की धमकी

​पीड़िता का आरोप है कि विवाद के दौरान उन्हें आदिवासी समुदाय से होने के कारण सार्वजनिक रूप से बेहद अपमानित किया गया। आरोपियों ने उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए अशोभनीय टिप्पणियां कीं। जब पीड़िता और उनके परिजनों ने जमीन पर हो रहे इस अवैध काम को रोकने का प्रयास किया, तो आरोपियों ने आक्रामक होते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी। आरोपियों ने रज्यन्ति सैयाम को विवादित जमीन में ही जिंदा गाड़ देने की बात कही, जिससे उनका पूरा परिवार सहम गया। इस घटना के बाद से पीड़ित परिवार मानसिक रूप से बेहद परेशान है।

परिवार के सामने जीविकोपार्जन का संकट हुआ खड़ा

​शिकायत के अनुसार मौके पर आज भी फेंसिंग टूटने और जबरन खंभे गाड़ने के निशान देखे जा सकते हैं। महिला ने पुलिस और राजस्व विभाग से संयुक्त रूप से घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच करने की मांग की है। इसके साथ ही आरोप लगाया गया है कि विवाद के बाद आरोपियों ने रात के समय उनके खेत में अवैध रूप से प्रवेश किया। आरोपियों ने वहां खड़ी मेहनत की फसल को पूरी तरह से रौंदकर बर्बाद कर दिया, जिससे पीड़ित परिवार को बहुत बड़ी आर्थिक क्षति हुई है और उनके सामने संकट खड़ा हो गया है।

खौफ के साए में बीता समय, प्रशासन से न्याय की गुहार

​रज्यन्ति सैयाम ने पुलिस को बताया कि घटना के तुरंत बाद वे शिकायत करने की स्थिति में नहीं थीं। आरोपियों की धमकियों के चलते उनका पूरा परिवार गहरे डर में था और उनके पति का इलाज भी चल रहा था। इस वजह से वे कई दिनों तक परेशान रहीं और खुलकर सामने नहीं आ सकीं। बाद में ग्रामीणों और समाज के सहयोग से उन्होंने पुलिस को आवेदन दिया। पीड़िता ने प्रशासन से दोषियों पर तत्काल कार्रवाई करने और आदिवासियों की जमीनों को भूमाफियाओं से सुरक्षित रखने का आग्रह किया है।

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