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जबलपुर नगर निगम में टैक्स समायोजन के बड़े गड़बड़झाले की जांच शुरू, दोषियों पर होगी एफआईआर



जबलपुर। नगर निगम में टैक्स समायोजन के नाम पर हुए करोड़ों रुपये के वित्तीय नुकसान को लेकर महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने आज ही एक विशेष जांच समिति गठित कर दी है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, भारतीय वरिष्ठ नागरिक एसोसिएशन, महिला समिति, मानव अधिकार क्रांति संगठन और पेंशनर समाज के पदाधिकारियों ने आज महापौर से मिलकर इस गड़बड़ी के खिलाफ ज्ञापन सौंपा था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए महापौर ने जांच समिति को 10 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने और पुलिस विभाग को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जारी किए हैं। इस दौरान टी.के.रायघटक, डी.के.सिंह, संतोष श्रीवास्तव, सुशीला कनौजिया, गीता पाण्डे, एड. वेदप्रकाश अधोलिया, डी.आर.लखेरा, अर्जुन कुमार परीड़ा, एड.जी.एस.सोनकर, मोहन श्रीवास्तव, टी.ई.एस.राजपूत, अब्दुल रहमान, यशवंत कोष्टा, कल्पना जोगेश्वर, मनीषा अग्रहरि, पंकज मेहता, नीरज नगाईच और एड.ब्रजेश साहू प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

​करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का खुलासा

​नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने पूरे मामले की तकनीकी खामियों को उजागर करते हुए बताया कि नगर निगम के भीतर बकाया संपत्ति कर और जलकर की राशि का गलत तरीकों से समायोजन किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया के कारण नगर निगम प्रशासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान उठाना पड़ा है। इस गड़बड़ी को अंजाम देने के लिए विभागीय नियमों की पूरी तरह से अनदेखी की गई है। अधिकारियों और कर्मचारियों ने नियमों को ताक पर रखकर एक संभागीय अधिकारी या राजस्व निरीक्षक की लॉगइन आईडी का इस्तेमाल कर दूसरे संभाग के अंतर्गत आने वाले वार्डों की संपत्तियों का नियम विरुद्ध समायोजन कर दिया, जिससे पूरा मामला संदेहास्पद हो गया है।

​गोहलपुर पुलिया चौड़ीकरण के लिए बजट स्वीकृत

​इसी बैठक के दौरान शहर के बुनियादी ढांचे से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की जानकारी भी साझा की गई। महापौर ने बताया कि गोहलपुर पुलिया चौड़ीकरण का रुका हुआ कार्य अगले सप्ताह से औपचारिक रूप से शुरू कर दिया जाएगा। इस पुलिया की नई ड्राइंग और डिजाइन को अंतिम तकनीकी अनुमोदन के लिए शासकीय जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के पास भेजा जा चुका है। वहां के विशेषज्ञों द्वारा अगले 2 या 3 दिनों के भीतर इस डिजाइन को मंजूरी दे दी जाएगी। इसके तुरंत बाद धरातल पर निर्माण कार्य गति पकड़ेगा।

​ संशोधित डिजाइन से बढ़ी परियोजना की लागत

​इस निर्माण कार्य के संबंध में तकनीकी बदलावों के कारण बजट में भी वृद्धि दर्ज की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार नई और उन्नत डिजाइन लागू करने की वजह से परियोजना का कुल खर्चा लगभग 71 लाख रुपये तक बढ़ गया है। नगर निगम प्रशासन द्वारा जनहित को ध्यान में रखते हुए इस बढ़ी हुई अतिरिक्त राशि की मंजूरी प्रदान कर दी गई है। इस बैठक में उपस्थित सभी सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने टैक्स मामले में त्वरित निष्पक्ष जांच और विकास कार्यों को समय पर पूरा करने की मांग का पुरजोर समर्थन किया है।

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