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ई-अटेंडेंस की तकनीकी गड़बड़ी दूर, संतान पालन अवकाश पर मिलेगी पूरी सैलरी



जबलपुर। मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में कार्यरत महिला शिक्षकों के हित में एक बड़ा और संवेदनशील फैसला लिया है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। नए आदेश के अनुसार, जिन महिला शिक्षकों का संतान पालन अवकाश सक्षम अधिकारी द्वारा स्वीकृत किया गया है, उनकी इस छुट्टी की अवधि को अब सत्र के कार्य दिवसों में ई-अटेंडेंस के लिए उपस्थिति के रूप में दर्ज किया जाएगा। दरअसल, सीसीएल स्वीकृत होने के बाद भी तकनीकी दिक्कतों के कारण कई महिला शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति पोर्टल पर दर्ज नहीं हो पा रही थी, जिससे उन्हें प्रशासनिक और वित्तीय स्तर पर कई तरह की दिक्कतों से जूझना पड़ रहा था। इसी समस्या के स्थाई समाधान के लिए विभाग ने यह नई व्यवस्था लागू की है, जिससे हजारों शिक्षिकाओं को सीधे तौर पर बड़ी राहत मिलेगी।

​सीसीएल अवधि अब ऑनलाइन पोर्टल पर उपस्थिति मानी जाएगी

​सरकारी स्कूलों में डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम लागू होने के बाद से ही महिला शिक्षिकाओं को चाइल्ड केयर लीव के दौरान अपनी हाजिरी को लेकर मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा था। कई मामलों में छुट्टी मंजूर होने के बावजूद ई-अटेंडेंस सॉफ्टवेयर में उन्हें अनुपस्थित दिखा दिया जाता था। इस विसंगति को दूर करने के लिए अब राज्य स्तरीय अभ्यावेदन निराकरण समिति का गठन किया गया है। प्रभावित महिला शिक्षक अपने मामले से जुड़ा आवेदन सीधे ई-मेल के जरिए इस समिति को भेज सकेंगी। प्राप्त आवेदनों की बारीकी से जांच करने के बाद समिति पात्र मामलों में निर्णय लेगी और स्वीकृत अवकाश अवधि को उपस्थिति में बदलने की प्रक्रिया पूरी करेगी।

​जिला शिक्षा अधिकारी आवेदनों को तुरंत राज्य समिति भेजेंगे

​इस नई व्यवस्था को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर सख्ती दिखाई है। डीपीआई ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि वे अपने जिले से आने वाले ऐसे सभी मामलों और आवेदनों को बिना किसी देरी के तुरंत राज्य स्तरीय समिति के पास भेजें। इस आदेश की प्रतिलिपि स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय, प्रदेश के सभी कलेक्टरों, संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी शिक्षिका का मामला जिला स्तर पर लंबित न रहे।

​डिजिटल हाजिरी के नियम भविष्य में और कड़े होंगे

​मध्यप्रदेश में जब से ई-अटेंडेंस प्रणाली की शुरुआत हुई है, तभी से शिक्षक संगठनों द्वारा इसका लगातार विरोध किया जा रहा है। महिला शिक्षकों की ओर से लंबे समय से मातृत्व और संतान पालन से जुड़े अवकाशों को इस सिस्टम में शामिल करने की मांग की जा रही थी। सरकार ने शिक्षिकाओं की इस प्रमुख मांग को स्वीकार करते हुए उन्हें बड़ी राहत तो दे दी है, लेकिन इसके साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि अन्य नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। आने वाले दिनों में स्कूलों में डिजिटल हाजिरी की व्यवस्था को और अधिक कड़ा और पारदर्शी बनाया जाएगा।

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