जबलपुर। पाटन तहसील अंतर्गत ग्राम नुनसर की निवासी 68 वर्षीय कैंसर पीड़ित महिला केशर देवी चौरसिया ने न्याय की गुहार लगाई है। केशर देवी ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है कि गजेन्द्र दुबे, गनेश उर्फ गन्नू दुबे समेत अन्य व्यक्तियों ने उनकी 68 डिसमिल कृषि भूमि पर जबरन कब्जा जमा रखा है। राजस्व विभाग द्वारा पूर्व में कराए गए सीमांकन में उक्त भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए गए। जब महिला ने अपनी जमीन की सुरक्षा के लिए सीमा पर खंभे लगवाए, तो आरोपियों ने उन्हें उखाड़ फेंका और जान से मारने की धमकी दी। गंभीर बीमारी से जूझ रही केशर देवी अब प्रशासन से अपनी जमीन मुक्त कराने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग कर रही हैं।
सीमांकन की रिपोर्ट के बाद भी प्रशासन मौन
राजस्व विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट में केशर देवी की भूमि पर अतिक्रमण साफ दिखाई दे रहा है। सीमांकन के दौरान नक्शे के अनुसार कब्जा स्पष्ट होने के बाद भी स्थानीय स्तर पर कोई कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। पीड़िता का आरोप है कि दबंगों के रसूख के कारण सरकारी अमला मूकदर्शक बना हुआ है। खंभे उखाड़ने जैसी हरकतें करने के बाद भी पुलिस ने अब तक कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया है, जिससे आरोपियों के हौसले बुलंद हैं। केशर देवी का परिवार इस समय गहरे मानसिक तनाव और असुरक्षा के बीच जीने को मजबूर है। कैंसर का इलाज कराने के बजाय महिला को दफ्तरों की चौखट पर अपनी पुश्तैनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
खतरे में है पीड़ित परिवार की जान और संपत्ति
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि गजेन्द्र और गनेश दुबे लगातार उनके पुत्र को जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। धमकियों के कारण परिवार के सदस्य घर से निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं। प्रशासन की सुस्ती का फायदा उठाकर आरोपी न केवल जमीन पर काबिज हैं, बल्कि लगातार डराने-धमकाने का सिलसिला भी जारी रखे हुए हैं। अब देखना यह है कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय से इस मामले में क्या निर्देश जारी होते हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। केशर देवी ने स्पष्ट रूप से सुरक्षा की मांग करते हुए अपनी कृषि भूमि को तत्काल प्रभाव से अतिक्रमण मुक्त कराने का आग्रह किया है ताकि वे अपना उपचार शांति से करा सकें।
