जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दमोह जिले के प्राथमिक शिक्षक राहुल पटेल की सेवा समाप्ति का आदेश पूरी तरह खारिज कर दिया है। न्यायालय ने जिला शिक्षा अधिकारी को इस पूरे मामले पर मेरिट के सिद्धांतों के अनुसार नए सिरे से विचार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इस मामले में याचिकाकर्ता को 30 मार्च 2023 को ओबीसी दिव्यांग वर्ग में नियुक्ति मिली थी, जिनके पास 45 प्रतिशत का स्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र था। दोबारा हुई जांच में दिव्यांगता 40 प्रतिशत से कम मिलने पर उनकी नौकरी खत्म कर दी गई थी। शिक्षक के पास 108.68 अंक थे और ओबीसी मेरिट में उनकी रैंक 2417 थी। कम अंक वालों को नौकरी मिलने के कारण उन्होंने सामान्य ओबीसी में समायोजन की मांग की थी।
नियमों की अनदेखी पर कोर्ट का कड़ा रुख
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने शिक्षा विभाग की जल्दबाजी में की गई कार्रवाई को गलत माना है। वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और अधिवक्ता हितेंद्र कुमार गोह्लानी ने अदालत में दलील दी कि विभाग ने सर्वोच्च न्यायालय के आरक्षण सिद्धांतों की पूरी तरह अवहेलना की है। विभाग को कर्मचारी का पक्ष सुनने के लिए तय समय सीमा का इंतजार करना चाहिए था, लेकिन उससे पहले ही बर्खास्तगी का आदेश थमा दिया गया।
मेरिट के आधार पर होगा दोबारा फैसला
न्यायालय ने जिला शिक्षा अधिकारी दमोह को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता के अंकों की तुलना ओबीसी वर्ग के अन्य चयनित उम्मीदवारों से की जाए। यदि राहुल पटेल बिना दिव्यांग कोटे के भी अपनी श्रेणी में चयन के पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें सेवा में वापस लिया जाएगा। कानूनी जानकारों के अनुसार यह फैसला भविष्य की भर्तियों में वर्टिकल और होरिजॉन्टल आरक्षण के सही क्रियान्वयन के लिए एक बड़ा उदाहरण बनेगा।
