स्थानांतरण के बावजूद कई कर्मचारी सीट छोड़ने को तैयार नहीं,थाना प्रभारियों द्वारा कार्यमुक्त न करने पर उठे सवाल
जबलपुर। पुलिस महकमे के भीतर प्रशासनिक अनुशासन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां पुलिस अधीक्षक द्वारा 8 मई 2026 को जारी किए गए एक कड़े स्थानांतरण आदेश की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। पुलिस अधीक्षक ने शहर के विभिन्न थानों में कई वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ वाहन चालकों का बड़े पैमाने पर तबादला किया था। इस शासकीय आदेश के तहत सभी संबंधित थाना प्रभारियों को स्पष्ट हिदायत दी गई थी कि वे इन चालकों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त करें। उन्हें रक्षित केंद्र जबलपुर की वाहन शाखा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर नए आवंटित थानों में जिम्मेदारी संभालनी थी। इस महत्वपूर्ण फैसले के बावजूद कई प्रभावशाली चालक विभागीय नियमों को ताक पर रखकर आज भी अपने पुराने थानों में ही जमे हुए हैं।
आदेश के बाद भी रवानगी अटकी
विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार स्थानांतरण सूची जारी होने के बाद कुछ चालकों ने ईमानदारी से नियमों का पालन किया और नए थानों में जाकर अपनी आमद भी दर्ज करा दी है। इसके विपरीत एक बड़ा गुट ऐसा भी है जो अपनी पुरानी सीट छोड़ने को कतई तैयार नहीं है। पुलिस महकमे के गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि इन चालकों को कुछ स्थानीय अधिकारियों और आंतरिक सूत्रों का कथित तौर पर मजबूत संरक्षण प्राप्त है। इसी प्रभाव के बल पर ये कर्मचारी पुलिस अधीक्षक जैसे उच्च पद पर बैठे अधिकारी के स्पष्ट दिशा-निर्देशों की भी खुलकर अनदेखी कर रहे हैं। इस स्थिति से पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठने लगी हैं कि आखिर इन कर्मचारियों पर मेहरबानी क्यों बरती जा रही है।
थाना प्रभारियों की भूमिका पर उठने लगे सवाल
इस पूरे मामले में संबंधित थाना प्रभारियों की भूमिका भी पूरी तरह से संदेह के घेरे में आ गई है। जब उच्च स्तर से यह साफ निर्देश था कि चालकों को तुरंत कार्यमुक्त कर रक्षित केंद्र जबलपुर भेजा जाए, तो फिर किस आधार पर उन्हें अब तक थानों में रोक कर रखा गया है। जानकार मानते हैं कि विभागीय आदेशों के पालन में दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है जो कि किसी भी अनुशासित बल के लिए सही संकेत नहीं है। कुछ विशेष कर्मचारियों को मिल रही यह अनुचित छूट अन्य कर्मचारियों के मनोबल को भी प्रभावित कर रही है जो समय पर अपने आदेशों का पालन कर चुके हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था और अनुशासन पर संकट
कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले विभाग में यदि इस तरह की मनमानी चलती रही तो प्रशासनिक ढांचा कमजोर हो जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इन हठधर्मी चालकों और उन्हें शह देने वाले जिम्मेदार लोगों पर कड़ा एक्शन नहीं लिया गया, तो भविष्य में कोई भी कर्मचारी बड़े अधिकारियों के आदेशों को गंभीरता से नहीं लेगा। फिलहाल पूरे जिले की नजरें अब रक्षित केंद्र और पुलिस अधीक्षक कार्यालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। देखना होगा कि इन बचे हुए चालकों को नई पदस्थापना पर भेजने के लिए विभाग क्या सख्त कदम उठाता है।
