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रेलवे स्टेशन में सुपरिटेंडेंट नहीं, मैनेजर होंगे, बोर्ड ने बदला पदनाम, बोर्ड का आदेश लागू

जबलपुर। रेलवे बोर्ड ने आदेश जारी किया है, जिसके तहत स्टेशनों के प्रबंधन की कमान संभालने वाले अधिकारियों के पदनाम बदल दिए गए हैं। अब स्टेशन सुपरिटेंडेंट को स्टेशन मैनेजर के नाम से जाना जाएगा। रेलवे बोर्ड ने ये बुधवार 22 अप्रैल को ये आदेश पश्चिम मध्य रेलवे सहित सभी जोनों को भेजते हुए तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है.

ये है बोर्ड का आदेश

4600 पे-ग्रेड पर कार्यरत स्टेशन सुपरिटेंडेंट, डिप्टी स्टेशन मैनेजर और 4800 पे-ग्रेड वाले स्टेशन सुपरिटेंडेंट अब स्टेशन मैनेजर कहलाएंगे। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि नाम बदलने से उनके वेतन, पद की श्रेणी, वरिष्ठता या पदोन्नति के नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा। उनकी कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियां पहले की तरह ही रहेंगी, केवल पद का नाम आधुनिक और प्रबंधकीय बनाया गया है।

स्टेशन मास्टरों में खुशी

रेलवे के इस निर्णय का स्टेशन मास्टरों और संबंधित स्टाफ ने स्वागत किया है। कर्मचारियों का मानना है कि स्टेशन मैनेजर पदनाम सुनने में अधिक सम्मानजनक और आधुनिक लगता है, जो आज के कॉर्पोरेट और प्रबंधकीय दौर के अनुकूल है।

 सभी जोनल रेलवे में व्यवस्था लागू होगी 

रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक पे-कमीशन और एचआरएमएस ने 22 अप्रैल को पश्चिम मध्य रेलवे समेत सभी जोनल रेलवे को पत्र जारी कर इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया है। वेतन स्तर (ग्रेड पे) के आधार पर पदनामों में यह संशोधन हुआ है। इसमें लेवल-सात (4600 ग्रेड पे) पद पर कार्यरत अधिकारियों को डिप्टी स्टेशन मैनेजर व लेवल-आठ (4800 ग्रेड पे) पद पर कार्यरत अधिकारी स्टेशन मैनेजर के नाम से पहचाने जाएंगे। 

क्या होगी जिम्मेदारी?

स्टेशन परिसर में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, भीड़ का प्रबंधन करना, आपातकालीन स्थिति में त्वरित निर्णय लेना, स्टेशन पर कर्मचारियों में समन्वय, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, ट्रेनों का सही समय पर स्टेशन आना-जाना, ट्रेन का रिकार्ड रखना, ट्रेनों के आगमन-प्रस्थान का समय दर्ज करना और महत्वपूर्ण पत्राचार का प्रबंधन करना भी उनके दैनिक कार्यों का हिस्सा है।

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