उन्होंने कहा कि राम जी की चरण धूल जीवन का अमृतांजन है। इसके लिए सबको प्रयास करना चाहिए। रामकृपा जग मंगल हेतू की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि प्रभू श्रीराम का जनम जब पूरे जगत के मंगल के लिए हुआ है तब हमारा मंगल भला क्यों नहीं हो सकता। महाराजश्री ने बताया कि रामजी ने पिता से कैसा व्यवहार करें, भाई के साथ कैसे संबंध रखें, गुरु का किस तरह सम्मान करें, यज्ञ की रक्षा कैसे करें, ये सब हमें सिखाया है।
अयोध्या आकर विश्वामित्रजी ने किया प्राश्चित-
रामचरित मानस के चतुर चितेरे पूज्यश्री ने कहा कि विश्वामित्रजी ने अयोध्या आकर प्राश्चित किया क्योंकि राम जनम जग मंगल हेतु। भगवान ने उनके प्राश्चित को सफल करा उनका मंगल कर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वामित्र जी अयोध्या दो बार आए। एक बार हरिश्चंद्र्र के कार्यकाल में और फिर रामचंद्र के कार्यकाल में। हरिश्चंद्र्र जी के समय विश्वामित्र जी ने उनकी पत्नी को उनसे अलग कर दिया था। उसका प्राश्चित रामचंद्र जी के कार्यकाल में हुआ।
विद्या को धारण करने का नाम निधि-
महाराज श्री ने एक प्रश्न के समाधान में कहा कि गोस्वामी जी ने बहुत सोच के लिखा ष्गुरु गृह गए पढऩ रघुराई अल्प काल विद्या सब आई। रामजी में थोड़े समय में ही सब विद्या आ गई और आने के बाद उन्होंने विद्या धारण किया। जो विद्या आए और आने के बाद धारण हो जाए वो निधि हो जाती है। जिसमें विद्याएं निवास करती हैं, उसे कहते हैं निधि।
इन्होंने किया पादुका पूजन-
कथा के पूर्व रामानंदा पीठ की चरण पादुकाओं का पूजन-अर्चन सांसद श्रीमति सुमित्रा वाल्मिक,सेवा निवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एम के दास, डॉ राजेश धीरवानी, कैलाश चन्द्र जैन,किशोर सिंह लोधी, अजय गुप्ता, अनूप खंडेलवाल ने समर्चन कर किया। पूजन का मंगल विधान तुलसी पीठ के आचार्य युवराज रामचंद्रदासजी ने सुखाचार्य द्वाराचार्य राघवदेवाचार्य जी की उपस्थिति में संपन्न कराया। पादुकापूजन करने के उपरांत सभी ने व्यास पीठ का पूजन कर महाराजश्री का स्वागत वंदन-अर्चन किया।
श्रीराम जानकी विवाह का अवसर-
आज की कथा में भगवान श्रीराम एवं माता जानकी के विवाह का अवसर था, पूज्य जगद्गुरु के श्रीमुख विवाह का वाचन हुआ। पूज्य वाणी को सुनकर श्रोता झूम उठे। मंच पर विवाह उत्सव मनाया गया। महामहोपाध्याय डॉ हरिशंकर दुबे, केके अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, थानेश्वर महावर, शरद काबरा, बृज बिहारी शर्मा, मुन्ना महाराज ने भी महाराजश्री का माल्यार्पण कर वंदन किया।