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खुद की बिजली फिर भी हजारों का फिक्स चार्ज, जानिए नियामक आयोग के आदेश का सच



नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने उठाई आवाज

जबलपुर । नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे की अगुवाई में जनसंगठनों ने घरेलू सौर ऊर्जा पर लगाए जा रहे फिक्स चार्ज का विरोध किया है. मंच का कहना है कि उपभोक्ता अपने स्वयं के खर्चे पर घर की छत पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली पैदा कर रहे हैं, लेकिन फिर भी उन पर फिक्स चार्ज लगाया जा रहा है. यह फिक्स चार्ज गलत है.

नियामक आयोग का पक्ष और फिक्स चार्ज का भार

​मंच ने नियामक आयोग के समक्ष इस फिक्स चार्ज पर आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसे आयोग ने खारिज कर दिया. आयोग के अनुसार, उपभोक्ताओं द्वारा सोलर प्लांट लगाने के बाद भी बिजली कंपनियों के वितरण नेटवर्क का उपयोग किया जा रहा है. इस नेटवर्क की लागत की वसूली के लिए यह फिक्स चार्ज वसूला जा रहा है, जो विद्युत अधिनियम 2003 के तहत है. मंच ने सोलर लगाने वाले उपभोक्ताओं के बिलों का विश्लेषण किया है. विश्लेषण में पाया गया कि फिक्स चार्ज बहुत ज्यादा है. यह सालाना 7 से 9 हजार रुपये और प्रतिमाह लगभग 600 रुपये है.

जनसंगठनों की मांग और भविष्य की राह

​इस भारी-भरकम फिक्स चार्ज के विरोध में जनसंगठनों ने ऊर्जा मंत्री को पत्र भेजकर राहत प्रदान करने की मांग की है. ​डॉ. पी.जी. नाजपांडे,​रजत भार्गव,​एड. वेदप्रकाश अधौलिया,​टी.के. रायघटक,​डी.के. सिंग,​सुशीला कनौजिया,​गीता पांडे,​सुभाष चंद्रा,​संतोष श्रीवास्तव​, डी.आर. लखरे व ​पी.एस. राजपूत ने कहा कि उम्मीद है कि ऊर्जा मंत्री उनकी मांग पर विचार करेंगे और घरेलू सौर ऊर्जा पर फिक्स चार्ज में राहत प्रदान करेंगे. यह खबर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच द्वारा जारी की गई है.

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