जबलपुर। शहर को भिक्षावृत्ति से मुक्त करने और समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्तियों को मुख्यधारा से जोडऩे के लिए नगर निगम द्वारा एक व्यापक और संवेदनशील अभियान चलाया जा रहा है। मध्यप्रदेश शासन की मंशा और स्माइल प्रोजेक्ट के तहत् इस पुनीत अभियान को प्रभावी बनाया जा रहा है। इस संबंध में निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने बताया कि भिक्षावृत्ति मुक्त जबलपुर के लिए नगर निगम की टीम द्वारा शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों, चौराहों और धार्मिक स्थलों पर विशेष रेस्क्यू व काउंसलिंग अभियान निरंतर जारी है।
निगमायुक्त श्री अहिरवार ने शहर के सम्माननीय जनों से अपील की है कि भीक्षावृत्ति को बढ़ावा न दें, उन्हें शिक्षित करके रोजगार से जोड़े ताकि वे भी सम्मान के साथ समाज की मुख्य धारा से जुड़कर जीवन यापन कर सकें। इस संबंध में उपायुक्त श्रीमती अंकिता जैन एवं नगर निगम के विधि अधिकारी राजीव अनभोरे ने जानकारी देते हुए बताया कि नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 360 एवं 361 के तहत् निगम सीमा के भीतर किसी सड़क या सार्वजनिक स्थानों में भिक्षा मांगना या भीक्षा देने के लिए उत्तेजित करने आदि अपराध है। इसमें कारावास की सजा के साथ-साथ अर्थदंड से दंडित करने का भी प्रावधान है।
14 भिक्षकों का हुआ पुनर्वास
उपायुक्त श्रीमती अंकिता जैन ने बताया कि अभियान के तहत आज नगर निगम की टीम ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए कुल 14 व्यक्तियों को रेस्क्यू किया। इसमें से 8 भिक्षकों को तत्काल नगर निगम द्वारा संचालित आश्रय स्थलों में शिफ्ट किया गया है, जहाँ उनके रहने और भोजन की समुचित व्यवस्था की गई है। वहीं, 6 अन्य व्यक्तियों को काउंसलिंग के उपरांत उनकी इच्छा एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए उनके गृह ग्राम भेजने की सुरक्षित व्यवस्था कराई गई।
काउंसलिंग और कौशल विकास पर जोर
श्रीमती जैन ने बताया कि नगर निगम प्रशासन का उद्देश्य केवल भिक्षकों को हटाना नहीं, बल्कि उनका स्थाई पुनर्वास करना है। रेस्क्यू किए गए व्यक्तियों की काउंसलिंग की जा रही है ताकि वे भिक्षावृत्ति त्याग कर सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित हों। रोजगार से जोडऩे की पहल, उन्होंने बताया कि यह कार्यक्षम भिक्षकों को समाज के मुख्य धारा से जोडऩे के लिए चलाए जा रहे हैं।
